जानियें, लोकप्रिये आमों की किस्मों एवं खासियत 

फलों के राजा कहे जाने वाले आम की कई तरह की प्रजातियाँ है जैसे कि दशहरी, लंगरा, चौसा, हापुस, अमरपाली, तोतापुरी, बादामी आदि और हर प्रजाति की अलग अलग खसियत है।

देशहरी

इस आम की प्रजाति को भारत की उत्तरी भागों में ज्यादातर उगाया जाता है। यह किस्म उत्तर प्रदेश की दशहरी गांव में मातृवृक्ष होने के कारण इस किस्म को दशहरी नाम से जाना जाता है। इस आम की स्वाद की बात करे तो इसकी स्वाद मीठा होता है।

लँगरा

इस आम की प्रजाति को भारत की उत्तर प्रदेश क्षेत्र बनारस और बिहार क्षेत्र के दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सबौर, दीघा आदि में उगाई जाती है इसके फलों का स्वाद मीठा होता है। जिससे यह अत्यन्त स्वादिष्ट किस्म की आम मानी जाती है। इस आम की खास बात ये है की इसकी फलों का छिलका बहुत पतला होता है और साथ ही फलों में गूदे की मात्रा अधिक तथा गुठली पतली होती है जिसके कारण इसे बहुत ज्यादा पसंद किया जाता है।

सुकुल

यह आम की किस्म ज्यादातर बिहार के क्षेत्र मे उगाया जाता है इसकी फल का आकार बङा होता है तथा इसकी फलों मे अधिक रेशा पाया जाता है इस आम का ज्यादातर उपयोग आचार बनाने के लिए किया जाता है।

बाम्बे ग्रीन

बाम्बे ग्रीन आम की प्रजाति को उत्तर भारत में खास तौर से बिहार या आस-पास के क्षेत्र में अधिक लगाया जाता है। यह आम अगेती किस्म की है। इसका फल का रंग हरा तथा आकार अन्डाकार होता है। इसका फल मध्यम आकार व अच्छे स्वाद वाला अधिक मीठा होता है।

जरदालू

इस किस्म की आमों की ज्यादातर उत्पादन उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और बिहार मे किया जाता है बिहार के सभी ज़िलों में इस आम का उत्पादन होता है। यह बाजार में सबसे पहले उपलब्ध होने वाली किस्मों में से एक है। इसकी खेती बिहार के भागलपुर जिले में बहुतायत में होती है। इसके फल के पकने के बाद यह उत्तम मिठास और विशिष्ट सुगंध युक्त हो जाता है। इसका भंडारण गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है एवं फल की तुड़ाई के बाद इसे चार-पांच दिनों तक सामान्य तापमान पर भंडारित किया जा सकता है। यह निर्यात के लिए उत्तम किस्म है।

केसर

इस आम को ज़्यादातार गुजरात के क्षेत्रों मे उगाया जाता है गुजरात में इस आम की किस्म का व्यावसायिक खेती होती है। इस आम की फल की बात करें तो इसकी फल की दोनों ऊपरी छोरों पर लाल रंग होता है और फल का आकार लम्बा होता है। इस आम के किस्म को रंग और स्वाद के कारण ज्यादा प्रसंद किया जाता है। इसका उपयोग डेसर्ट, शेक और अन्य आकर्षक चीज़ें बनाने मे किया जाता है।

हिमसागर

इस आम की किस्म ज्यादातर पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में पाया जाता है। यह आम के फल दिखने मे हरा होता है. लेकिन स्वाद में लाजवाब होता है। इसकी फल मध्यम आकार की होती है। और इसकी वजन 250-350 ग्राम के बीच होता है और इसमें मलाईदार गुदा होता है जो डेसर्ट और शेक बनाने के लिए अच्छा माना जाता है। ये बाहर से भले ही हरे रंग का होता है लेकिन इसके गूदे पीले रंग के होते हैं।

पूसा लालिमा

यह आम की किस्म दशहरी और सेंसेशन (Sensation) के क्रॉस से बनी संकर किस्म की प्रजाति है। इसका फल लाल रंग के बहुत ही आकर्षक होते है जून के महीने मे इसका फल पकना प्रारंभ हो जाता है। इसे नियमित फलन और शीघ्र पकने वाली किस्म के कारण भी जाना जाता है।

मालिका

यह आम की किस्म नीलम और दशहरी के क्रॉस से बनी संकर किस्म की प्रजाति है। इसका फल नारंगी पीले रंग का होता है। जिसमें गहरे नारंगी रंग का गूदा और एक बहुत पतली गुठली होती है। गुठली के पतले होने और इसकी फल का स्वाद के अच्छे होने के कारण इस आम की मांग बाजारों मे काफी देखने को मिलता है।

आम्रपाली

यह आम की किस्म दशहरी और नीलम के क्रॉस से बनी संकर प्रजाति है। जो की लाल सुर्ख रंग और हल्के खट्टे-मीठे स्वाद के कारण जाना जाता है। इस आम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विटामिन की मात्रा अन्य आमों की तुलना में ज्यादा पाई जाती है। इस आम की एक और खास बात ये है कि अन्य आमों की तुलना इस आम की प्रजाति को ज्यादा जगह ही जरूरत नहीं होती है। इसे ग्रह वाटिका यानि की kitchin garden मे भी आसानी से उगाया जा सकता है।  इस आम की किस्म को एक हेक्टेयर करीब 1600 पौधे उगाए जा सकते हैं।

चौसा

चौसा

इस आम की प्रजाति को इसके फल के मीठे होने के लिए जाना जाता है ये आम की किस्म लोकप्रिये आमों की किस्मों मे से एक है। जो की स्वाद और मीठेपन की वजह से इसकी मार्केट मे काफी मांग होती है। यह आम की किस्म आमतौर पर गर्मी मौसम के अंत मे और बारिश के प्रारंभ में बाजार मे उपलब्ध होता है।

मलगोआ

इस आम की प्रजाति को दक्षिण भारत मे व्यावसायिक तौर पर इस आम की किस्म को लगाया जाता है। इसका फल देखने में बड़ा, गोलाकार तथा उठा हुआ होता है इसके फल कि गूदा पीला तथा स्वाद अत्यन्त अच्छा होता है। इसके फल को ज्यादा दिनों तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता है। ये आम की किस्म ज्यादातर मई और जून मे बाजारों मे उपस्थित होता है।

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