Tilted Green Blob

जानिए, जीवामृत से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें  

जीवामृत लाभदायक सूक्ष्म जीवों का भण्डार हैं, इसमे लाभदायक सूक्ष्म जीव एजोस्पाइरीन्लम, पी.एस.एम, स्यूडोमोनास, ट्रसइकोडमर्गा, यीस्ट एवं मोल्ड आदि पाए जाते हैं। जीवामृत पौधों के लिए आवश्यक तत्व प्रदान करने मे अहम भूमिका निभाती है। 

जीवामृत (Jeevamrit) को आसानी से कोई भी बना सकता है इसे बनाने के लिए कुछ सामग्री की आवश्यकता होती है तो कुछ सावधानियाँ बरतने की।

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जीवामृत का प्रयोग सिंचाई के पानी के साथ, सीधा भूमि की सतह पर दो पौधों के बीच एवं खङी फसल पर छिङकाव करके किया जाता हैं। जीवामृत का महीने मे एक या दो बार उपलब्धता के अनुसार 200 लीटर प्रति एकङ के हिसाब से सिंचाई के पानी के साथ किया जा सकता हैं।

जीवामृत खेत मे उपलब्ध जैव अवशेष के विघटन हेतु एक प्रभावी जैव नियामक है यह पौधों को मुख्य तथा सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ-साथ कीट रोग निवारण मे भी सहायक हैं। इसके प्रयोग से भूमि की उर्वरता एवं फसल उत्पाद मे वृद्धि होती हैं।

जीवामृत जब सिंचाई के साथ खेत मे डाला जाता है तो भूमि मे जीवाणुओ की संख्या अविश्वसनीय बढ़ जाती है और भूमि की रासायनिक एवं जैविक गुणों मे वृद्धि होती है। जीवामृत के उपयोग से मिट्टी स्वस्थ रहता है और फसल भी उतनी ही बेहतर होती हैं इससे किसानों के मित्र कहे जाने वाले केचुओ की संख्या भी बढ़ती हैं। 

जीवामृत बनाने की विधि को जानने के लिए नीचे क्लिक करें।

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