खीरे के उन्नत किस्मों एवं इसकी पैदावार

खीरे की कई उन्नत किस्म विकशित हो चुकी हैं जिनमे की कुछ किस्म सामान्य किस्म के है तो कुछ संकर किस्म के है हमारे देश के किसान खीरे की कुछ विदेशी किस्मों की खेती कर रहे है और उन किस्मों से भी अच्छे मुनाफे कमा रहे है तो आइये जानते है खीरे के कुछ उन्नत और संकर किस्मों के साथ कुछ विदेशी किस्मों की विशेषताएं और पैदावार के बारे मे।

पूसा उदय

खीरे के इस किस्म के फल माध्यम आकार एवं 13 से 15 सेंटीमीटर लंबे, हल्के हरे रंग की होती है यह किस्म 50 से 52 दिनों मे तैयार हो जाता है यह किस्म भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकशित की गई है।

पूसा संयोग

यह संकर किस्म की जल्दी और अधिक उपज देने वाला खीरे की किस्म है इसका फल 28 से 30 सेंटीमीटर लंबा गहरे हरे रंग का होता है यह किस्म 45 से 50 दिनों मे तैयार हो जाता है।

पूसा बरखा 

पूसा बरखा उच्च मात्रा में नमी और तापमान वाली किस्म माना जाता है. इस खीरे के किस्म मे पत्तों के धब्बों में रोग को सहन करने की श्रमता होती है. यह किस्म प्रति हेक्टेयर 30 से 35 टन तक की पैदावार देती है।

जापानीज लौंग ग्रीन

यह खीरे की अगेती किस्म है, यह बुआई के 45 दिन में फल देना शुरू कर देती है, इसका फल 30 से 40 सेंटीमीटर लम्बे तथा हरे रंग के होते है. गूदा हल्का हरा और कुरकुरा होता है यह किस्म पहाङी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।

स्ट्रेट ऐट

यह किस्म पहाङी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इसका फल माध्यम लंबे, गोल सीरे वाले माध्यम हरा रंग के होते है।

स्वर्ण शीतल

इस खीरे के किस्म के फल माध्यम आकार के लंबे होते है यह किस्म 60 से 65 दिनों मे तैयार हो जाता है यह किस्म प्रति हेक्टेयर 25 से 30 टन तक की पैदावार देती है।

स्वर्ण पूर्णा

इसका फल लंबे, मध्यम आकार के और हल्के हरे रंग के होते हैं. यह किस्म 55 से 60 दिनों मे तैयार हो जाता है यह किस्म प्रति हेक्टेयर 30 से 35 टन तक की पैदावार देती है। 

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