धान की मैट टाइप नर्सरी कैसें तैयार करते हैं, जानें 

मैट नर्सरी विधि की खासियत है कि यह धान की नर्सरी को 15 से 20 दिन में तैयार कर देती है. इसमें कम पानी और जमीन की आवश्यकता पड़ती है। 

कैसे नर्सरी तैयार करें

बीचङे को तैयार करने के लिए नर्सरी बैड को समतल भूमि पर बनाना चाहिये तथा इसके साथ मेढ़/नाली भी बनाना चाहिए. जिससे सिंचाई करने मे आसानी हो एवं आवश्यकता पङने पर पानी निकाला भी जा सके।

बीचङा तैयार करने के लिए मृदा मिश्रण बनाना अति आवश्यक होता है जिससे की पौधे को उचित मात्रा मे पोषक तत्व प्राप्त हो। भूमि की उपरी सतह की मिट्टी को इकट्ठा करके तथा फिर उसे सुखाने व भुरभुरी करने के बाद 4-5 मि.मी. छिद्र के आकार की छननी से छन लेते है।

नर्सरी बैड तैयार हो जाने के बाद बेड पर पोलीथीन बिछाकर 1.5 सेंटीमीटर ऊँची मिट्टी की परत फैल दे।

एक दिन के लिए बीज को पानी में डुबाकर रखे इसके बाद बीज को पानी से निकालकर एक से डेढ़ दिन के लिये पटसन की बोरी/कपड़े से लपेटकर बांध देते है। इस तरह बांधकर रखने से एक से डेढ़ दिन बाद बीज अंकुरित हो जाता है।

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बीज अंकुरित हो जाने के बाद बीज को बेड पर 1 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर मे डाल दे. बोए हुए बीज को मृदा मिश्रण कि पतली परत से ढक दें।

बीज की बुआई करने के तुरन्त बाद हजारे(झरना) से पानी देना चाहिए। जिससे अंकुरित बीज सूख न पाए। तीन से चार दिन तक इस प्रकार आवश्यकतानुसार पानी देते रहना चाहिए। इस तरह तीन-चार दिन तक पानी देने के बाद बीज अच्छी तरह से जम जाता है. जब पौध की उंचाई बढ़ जाती है तब सतही विधि से सिंचाई की जा सकती है।

लगभग 15 से 20 दिनों मे पौध में 3-4 पत्तियां आ जाती है एवं इनकी ऊंचाई भी 15 सेंटीमीटर के करीब हो जाती है तो ऐसे मे पौध रोपाई के लिए तैयार हो जाती है।

जब पौध रोपाई के लिए तैयार हो जाती है तो ऐसे मे मशीन की ट्रे की साईज के अनुसार बेड से पौध को धारदार चाकू से काट कर ट्रे में रखकर इसकी रोपाई की जा सकती हैं।

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