सहजन की खेती से कम लागत मे कमाया जा सकता है अच्छा मुनाफा , जानें कैसे

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सहजन (Drumstick) को कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है, इसे सुजना, मूनगा एवं सेंजन आदि नामों से भी जाना जाता है। इसे अंग्रेजी में ड्रम स्टिक ट्री के नाम से जानते है।

सहजन बहूउपयोगी पेङ है इसके फूल पत्तियों का उपयोग अनेक प्रकार के व्यंजन बनाने मे पूरे वर्ष उपयोग किया जाता है।

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सहजन की जितनी माँग सब्ज़ी के रूप में है, उतनी ही औषधीय इस्तेमाल के लिए भी है। सहजन औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। इसकी पतियाँ, फूल और फलियाँ पोषक से भरपूर होती है जो की मनुष्य के साथ-साथ पशुओ के लिए भी बहुत उपयोगी होती हैं।

सहजन की पत्तियों मे विटामिन सी, आयरन, फाइबर, कैल्शियम, फास्फोरस तथा खनिज तत्व मौजूद होते है। जो की स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा माना जाता है। सहजन का उपयोग चटनी, सब्जी, आचार आदि के रूप मे करके कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है।

सहजन की खेती सभी तरह के मिट्टी मे की जा सकती है, सहजन की खेती बिना किसी विशेष देखभाल के बहुत ही कम लागत मे भारी मुनाफा दे सकती है।

सहजन की पौष्टिक गुणों की तुलना निम्नलिखित है। प्रोटीन ➢  दही के तुलना मे तीन गुना पोटेशियम ➢  केले से तीन गुना कैल्शियम ➢  दूध से चार गुना विटामिन ‘सी’ ➢  संतरे से सात गुना विटामिन ‘ए’ ➢  गाजर से चार गुना

सहजन की खेती के साथ-साथ किसान इंटरक्रॉपिंग करके अतिरिक्त लाभ कमा सकते है किसानों को इंटरक्रॉपिंग के लिए, ऐसी फसलों को चुनाव करना चाहिए जो कि सूखे के लि‍ए सहिष्णु हैं और उनकी मिट्टी की प्राथमिकता भी सहजन के समान हो।

दक्षिण भारत के लोग सहजन के फूल, फल, छाल एवं पत्ती आदि सभी चीजों का उपयोग अपने विभिन्न प्रकार के व्यंजनों मे पूरे वर्ष भर करते है।

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