Monday, October 3, 2022

Biofloc Fish Farming : बायोफ्लॉक तकनीक से बिना तालाब के करें, मछली पालन : जानें इससे जुङी कई महत्वपूर्ण बातें।

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हमारे देश मे मछली पालन (Fish Farming ) के लिए अब नए और आधुनिक तरीके आपनाए जा रहे है जिसकी मदद से मछली पालन करना काफी आसान हो गया है। वही अगर बात करें आज से कुछ वर्ष पहले की तो हमारे यहाँ मछली पालन के लिए ज्यादा तालाब नहीं हुआ करती थी जिसकी वजह से मछली का उत्पादन कम होता था। पहले के समय मे मछली बाजार मे नदी या समुद्रों से पकङ कर लाया जाता था जो की काफी जोखिम भरा काम था। लेकिन आज के आधुनिक युग मे मछली पालन करने के लिए कई ऐसी तकनीक विकसित हुई है जिसकी मदद से मछली पालन करना काफी आसान हो गया है इन्ही तकनीकों मे से एक है बायोफ्लॉक (Biofloc Fish Farming) मे मछली पालन करना। बायॉफ्लोक मछली पालन करने के लिए सबसे आधुनिकतम तरीकों में से एक हैं।

हमारा देश भारत पूरे विश्व मे दूसरा सबसे बङा मछली उत्पादक देश हैं गुजरात भारत में समुद्री मछली का सबसे बड़ा उत्‍पादक राज्‍य है। आंध्र प्रदेश मे सर्वाधिक अंतर्देशीय मछली का उत्‍पादन किया जाता है। मछली पालन लाखों लोगों के लिए भोजन, पोषण, आय और आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है। मछली पालन रोजगार के नए अवसरों को पैदा करने मे काफी अच्छी भूमिका निभा रही हैं। सरकार द्वारा भी मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) एवं मछुआरों और मछली पालकों को मछली पालन करने के लिए ऋण मुहाया हो सके इसके लिया किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना का लाभ अब मछुआरों और मछली पालकों को भी दिया जा रहा हैं। मछली पालकों को केसीसी (Kisan Credit Card) जारी करने के लिए कई बार सरकार द्वारा समय-समय पर विशेष अभियान भी चलाया है।

Biofloc
Biofloc Fish Farming

बायोफ्लॉक (Biofloc Fish Farming) तकनीक से मछली पालन करने मे मछुआरों और मछली पालकों को पानी, एवं भूमि की आवश्यकता कम होती हैं जिससे लागत मे कमी आती हैं। इस तकनीक से कम जगह मे मछली पालन करके अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता हैं। इस तकनीक से मछली पालन करने पर तालाब की आवश्यकता नहीं होती हैं इसमे टैंक मे ही मछली पालन हो जाता है साथ ही इसके लिए किसी भी प्रकार के खास मिट्टी या भूमि की आवश्यकता नहीं होती हैं उपजाऊ या बिना उपजाऊ भूमि से इसमे कोई फर्क नहीं पङता हैं। कुछ बातों को ध्यान मे रखकर बायोफ्लॉक मे आसानी से मछली पालन किया जा सकता हैं जैसे कि इसमे बायोफ्लॉक की मात्रा एवं पानी की गुणवत्ता की जांच समय-समय पर करने की आवश्यता होती हैं और साथ ही इसमे निरंतर ऑक्सीजन प्रवाह होनी चाहिए।

क्या हैं बायोफ्लॉक (Biofloc kya hai)

टैंक में मछली पालन करने की एक विधि है बायोफ्लॉक। बायोफ्लॉक मे मछली पालन करने के लिए तालाब की आवश्यकता नहीं होती हैं। बायोफ्लॉक तकनीक से कम पानी, कम भूमि और कम खर्च में अधिक मछली उत्पादन किया जा सकता है। इस तकनीक मे पानी की बचत के साथ-साथ मछलियों की आहार की भी बचत होती हैं क्योंकि मछलियाँ खाती हैं तो मल के रूप मे वेस्ट निकालती है ये वेस्ट पानी के अंदर ही रहता हैं इसकी वेस्ट को बैक्टीरिया द्वारा मछलियों के मल और अतिरिक्त भोजन को प्रोटीन सेल में बदल कर मछलियों के खाने में बदल दिया जाता है। इस खाने को मछलियाँ फिर से खा लेती है जिससे आहार की बचत होती हैं।

Agriculture in hindi

बायोफ्लॉक तकनीक से पालने योग्य मछलियों की उपयुक्त प्रजातियाँ (Biofloc me kon si machali ka palan kare)

बायोफ्लॉक तकनीक से पंगेसियस, तिलापिया, मांगुर, सिंघी, कॉमन कार्प, पाबडा, रोहू, मिल्क फिश आदि को पाला जाता हैं।

मछलियों की फ़ीड की होती हैं, बचत

बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन करने पर होती हैं मछलियों की आहार की बचत। बचत होने का मुख्य कारण हैं मछली पालन मे बाहर से दिये गए मछलियों के फ़ीड का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा ही मछलियाँ खाती हैं और लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा अपशिष्ट के रूप मे पानी मे ही रह जाता हैं। इसी अपशिष्ट से विकसित जटिल कार्बनिक एवं अकार्बनिक उत्पादों को विशेष सूक्ष्म जीवों द्वारा ऑक्सीकरण करके पुनःनवीनीकरण कर खाद्य पदार्थों मे प्रवर्तित कर दिया जाता हैं। अपशिष्ट से तैयार माइकोप्रोटीन मछली को 20 से 30 प्रतिशत अधिक प्रोटीन देता हैं। सूक्ष्म जीव अपशिष्ट को प्रोटीन मे बदल देता हैं जिससे मछलियों के फ़ीड की बचत होती हैं।

Fish Farming Kya hai in hindi
Fish Farming

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बायोफ्लॉक मे मछली पालन कैसें करें (Biofloc me machali palan kaise kare)

बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन करना काफी आसान हैं इसमे न तो तालाब की आवश्यकता होती हैं और नहीं ज्यादा जल एवं भूमि की। इस तकनीक से मछली पालन करने के लिए सबसे पहले सामान्यतः सीमेंट या तारपोलिन से बने टैंक की जरुरत होती है। जिसमे की जल भरकर मछलियों के लिए तालाब जैसा अनुकूल वातावरण तैयार किया जाता हैं। इसी के साथ एयरेशन (हवादार) सिस्टम, बिजली की उपलब्धता, मछलियों का आहार और मछली बीज का प्रबंधन भी मछली पालकों को करना होता है। बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन करने पर लगातार पानी एवं ऑक्सीजन की आवश्यकता होती हैं इसलिए मछली पालकों को बायोफ्लॉक मे मछली पालन करने से पहले इन सभी चीजों का प्रबन्ध पहले से ही कर लेना चाहिए ताकि बाद मे इन सभी चीजों के ना होने से किसी भी तरह का नुकसान न हो पाए। 

बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन करने के लिए सारे सेटअप हो जाने के बाद टैंक मे पानी को भरकर मछलियों के बच्चे को टैंक मे छोङ दिया जाता है और समय-समय पर मछलियों को आहार एवं टैंक मे कम पानी होने पर पानी डाला जाता हैं। टैंक की पानी गंदा होने पर पानी बदलने ही आवश्यकता होती हैं इसलिए समय-समय पर टैंक की पानी की ऑक्सीजन एवं पानी का पी.एच मान चेक करते रहना चाहिए। टैंक मे ऑक्सीजन की कमी एवं अन्य समस्या होने पर समस्या का समाधान जल्दी करना चाहिए ताकि मछलियों को नुकसान न पहुंचे।

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बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन करने के फायदें (Biofloc me machali palan karne ke fyade)
  • बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन करने पर तालाब की आवश्यकता नहीं होती हैं यानि कि तालाब खोदने की जरूरत नहीं होती है।
  • मछलियों मे किसी एक टैंक मे बीमारी होने पर दूसरे टैंक मे बीमारी नहीं फैलती है वहीं अगर तालाब मे कोई बीमारी फैलती है तो वो बीमारी पूरे तलाब मे फैल जाती हैं।
  • पानी एवं भूमि की आवश्यकता कम होती हैं।
  • बायोफ्लॉक तकनीक से कम जगह मे अधिक मछली का उत्पादन लिया जा सकता हैं।
  • बायोफ्लॉक तकनीक से शहरों मे भी मछली पालन किया जा सकता हैं।
  • इस तकनीक से मछली पालन करने के लिए खास तरह की जमीन एवं मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती हैं इसे अनउपयोगी जमीन पर कम पानी का उपयोग करके किया जा सकता हैं।
Biofloc Fish Farming
Biofloc Fish Farming
होती हैं अच्छी कमाई (Good earning)

हमारे देश मे ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया मे मछलियों की मांग बढ़ती जा रही है. वहीं मांग बढ़ने का मुख्य कारण मछली का स्वादिष्ट होना और इसमें उपस्थित कई प्रोटीन एवं विटामिन्स के स्रोतों का होना है. इसलिए विश्व स्तर पर इसका बाजार बढ़ता ही जा रहा है। हमारे देश कि लगभग 60% आबादी मछली खाना पसंद करती है जिसकी वजह से भी मछली की मांग बढ़ी है। पूरे वर्ष मछलियों की मांग बज़ारों मे देखने को मिलता हैं मांग बढ़ने से मछलियों की कीमत मे भी बढ़ोतरी हुई हैं जिसके कारण मछली पालन करने वाले मछली पालकों को मछली पालान करने से अच्छी कमाई होती हैं। इस तकनीक से मछली पालन करने पर शुरुआत के दिनों मे टैंक बनाने एवं अन्य समाग्री खरीदने मे कुछ ज्यादा लागत आती है लेकिन एक बार टैंक आदि बन जाने के बाद इससे कई वर्षों तक आमदनी कमाया जा सकता हैं। मछली पालन करने के छह महीने के बाद ही अच्छा मुनाफा मिलना शुरू हो जाता है।

तो दोस्तों मुझे आशा है कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा, अगर आपको पसंद आया है तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे। और उन तक भी बायोफ्लॉक तकनीक (Biofloc Fish Farming) के बारे मे जानकारी पहुँचाए।

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4 COMMENTS

    • दीपक जी, आप मछली पालन के परीक्षण के लिए कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं कृषि विज्ञान केंद्र समय-समय पर मछली पालन एवं अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती रहती हैं।

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