Monday, October 3, 2022

Cucumber Farming : खीरा की खेती कैसें करें, साथ ही जाने खीरे की खेती से जुङी महत्वपूर्ण बातें।

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खीरे की खेती (Cucumber Farming) ज्यादातर जायद और खरीफ़ दो सीजन में की जाती है. वैसे तो खीरे की खेती पॉलीहाउस या ग्रीन हाउस मे पूरे साल भर आसानी से किया जा सकता है। आमतौर पर खीरे की मांग गर्मियों के मौसम मे ज्यादा देखने को मिलता है क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती हैं जिससे इसका सेवन गर्मियों के मौसम मे करना काफी लाभदायक होता हैं, खासतौर से गर्मियों में खीरा खाने से पेट से जुड़ी बीमारियां दूर रहती हैं। खीरे में 95 फीसदी पानी होता है जो गर्मियों में शरीर को डी-हाइड्रेट होने से बचा सकता है एवं इसमे कई तरह के विटामिन एवं पोषक तत्व पाए जाते है जो कि त्वचा और बालों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। खीरे को कच्चा, सलाद या सब्जियों के रूप में प्रयोग किया जाता है।

खीरे का वानस्पतिक नाम कुकुमिस स्टीव्स (Cucumis sativus) है इसका गुणसूत्र संख्या  2n=2x=14 हैं। इसका जन्म स्थान भारत (India) हैं यह पाले के प्रति संवेदनशील होता है। खीरा एक-वर्षीय लता हैं इसकी पत्तियाँ हरे एवं फूल पीले होते है। अगर आप भी खीरे की खेती करने का सोच रहे हैं तो ये लेख आपको खीरे की खेती से संबंधित जानकारी जुटाने मे मदद कर सकता हैं क्योंकि इस लेख मे खीरे की खेती से संबंधित पूरी जानकारी देने की कोशिश की गई हैं।

Cucumbers
Cucumbers

खीरा की किस्में (Khira ki variety)

Pusa Uday (पूसा उदय)
Pusa Barkha (पूसा बरखा)
Swarna Ageti (स्वर्ण अगेती)
Swarna Sheetal (स्वर्ण शीतल)
Himangi (हिमांगी)
Phule Shubangi (फुले शुभांगी)
Sheetal (शीतल)
Pant Parthenocarpic Khira – 2 (पंत पार्थेनोकार्पिक खिरा – 2)
Pant Parthenocarpic Khira – 3 (पंत पार्थेनोकार्पिक खिरा – 3)
Pant Sankar Khira – 1 (पंत संकर खीरा – 1)
Pant Khira 1 (पंत खीरा 1)
Swarna Poorna (स्वर्ण पूर्णा)
Phule Prachi (फुले प्राची)
Punjab Khira -1 (पंजाब खीरा 1)
Punjab Naveen (पंजाब नवीन)

खीरा की विदेशी किस्म (Exotic Variety of Cucumber)

खीरा की विदेशी किस्में- जापानी लौंग ग्रीन, स्ट्रेट- 8 और पाइनसेट आदि

खीरा की संकर किस्म (Cucumbers hybrid Varieties)

खीरा के संकर किस्में- पंत संकर खीरा- 1, पूसा संयोग आदि

खीरे के किस्मों के बारे मे और विस्तार से जानने के लिए नीचे Click here पर क्लिक करें। – Click here

 

खीरा की खेती (Kheera ki kheti)

खीरा की खेती के लिए मिट्टी एवं जलवायु (Soil and Climate for Cucumber Cultivation)

खीरे की खेती (Kheera ki kheti) के लिए बलुई दोमट या दोमट भूमि जिसमे जल जमाव न हो इसकी खेती के लिए काफी अच्छा माना जाता हैं। यानि कि किसान जिस खेत मे खीरे की खेती कर रहे हैं उसमे जल जमाव न हो इसके लिए किसानों को पहले से ही इसका उपाय कर लेना चाहिए।
जलवायु की बात करें तो वैसे तो खीरा गर्म जलवायु की फसल हैं लेकिन आजकल पॉलीहाउस मे खीरे की खेती पूरे वर्ष की जाती हैं और खीरा का अच्छा उत्पादन भी किसानों को मिलता हैं। खीरा की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली गहरी एवं उपजाऊ भूमि जिसमे जैविक पदार्थ अधिक हो खेत की मिट्टी का पी0 एच0 मान लगभग 5.5 से 6.7 हो तो ऐसी भूमि खीरे कि खेती के लिए अच्छी होती है। खीरे की अच्छी बढ़वार एवं फल-फूल के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस का तापमान अच्छा होता हैं इसमे अधिक तापमान एवं आर्द्रता होने पर रोगों एवं कीटों की प्रकोप की संभावना बढ़ जाती हैं इसकी फसल पर पाले का प्रभाव अधिक होता हैं।
Cucumbers
Cucumbers
खीरे की खेती के लिए भूमि की तैयारी (Land preparation for cucumber cultivation)

किसी भी फसल से अच्छी पैदावर लेने के लिए भूमि की अच्छी तैयारी करना बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है खीरा की खेती के लिए भूमि की 3 से 4 जुताई करना काफी अच्छा माना जाता है खेत की पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल यानि की मोल्ड बोर्ड हल (Mould Board Plough), डिस्क प्लॉऊ (Disc Plough) या स्वदेशी हल (Indigenous plough) आदि से करना चाहिए। खेत की मिट्टी को समतल करने के लिए पाटा का उपयोग करना काफी अच्छा होता है। 

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खीरे की बुआई का समय (Cucumber planting time)

मैदानी क्षेत्रों मे खीरे की मुख्य फसल के लिए बुआई का समय फरवरी एवं जून के प्रथम सप्ताह एवं दक्षिण भारत मे इसकी बुआई जून से लेकर अक्टूबर तक करते हैं जबकि पर्वतीय भागों मे इसकी बुआई अप्रैल से मई मे की जाती हैं। गर्मियों मे खीरे की फसल जल्दी लेने के लिए खीरे की पौध की नर्सरी पहले से ही तैयार कर लेते हैं नर्सरी तैयार करने के लिए प्रो ट्रे का इस्तेमाल करते हैं जिसमे नर्सरी 20 से 25 दिनों मे रोपण हेतु तैयार हो जाता हैं।

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खीरे की बीज की बुआई (Cucumber seed sowing)

अच्छी तरह से तैयार खेत मे 1.5 मीटर की दूरी पर मेङ बना लेना चाहिए एवं मेङो पर 60 सेंटीमीटर की दूरी पर खीरे की बीज की बुआई के लिए गढ़्ढे बना लेना चाहिए। एक गढ़्ढे मे 2 बीजों की बुआई करते हैं। एक हेक्टेयर मे खीरे की खेती के लिए करीब 2 से 2.25 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती हैं। खेत मे बीज की बुआई से पहले बीजों को फफूंदीनाशक दवा से उपचारित कर लेना चाहिए। बीजों को उपचारित करने के लिए केप्तान या थिरम का प्रयोग 2 ग्राम प्रति किलो के हिसाब से बीज को उपचारित करते हैं। बुआई करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि खेत की मिट्टी मे पर्याप्त नमी हो। पर्याप्त नमी नहीं होने से बीजों का अंकुरण एवं वृद्धि विकाश अच्छे से नहीं होता हैं।

Kheera ki kheti
Kheera ki kheti
खीरा की फसल मे सिंचाई (Irrigation in Cucumber Crop)

गर्मियों के दिनों मे 5 से 8 दिनों के अंतराल पर एवं सर्दियों के मौसम मे 10 से 15 दिनों के अंतराल पर खीरा की फसल की सिंचाई करें। फसलों को सिंचाई की आवश्यकता पङने पर ही फसलों को आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। साथ ही इस बात का ध्यान रखे कि तने की वृद्धि, फूल आने के समय एवं फल के बढ़ने के समय पानी की कमी फसल को न हो।

खीरा की फसल मे खरपतवार नियंत्रण (Weed control in cucumber crop)

खीरा की फसल मे खरपतवार का ज्यादा प्रकोप होने पर इसका नियंत्रण करना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है बुआई के शुरुआत के दिनों मे खरपतवार फसल को ज्यादा नुकसान पहुचाते हैं इससे फसल के वृद्धि पर प्रभाव पङता हैं अतः खेत मे जरूरत पङने पर खरपतवार निकालते रहना चाहिए साथ ही पौधों की जङो की समुचित विकाश के लिए निराई-गुङाई करना काफी आवश्यक माना जाता है इसकी फसल मे निराई-गुङाई करने से जङो के आस-पास की मिट्टी ढीली हो जाती है जिससे की हवा का आवागमन अच्छी तरह से होता है जिसका अच्छा प्रभाव हमारी फसल के पैदावार पर पङती है अगर सिंचाई करने या वर्षा के मौसम मे पौधों की जङो के पास की मिट्टी हट गई हो तो ऐसे मे चारों तरफ से पौधों के जङो के पास मिट्टी चढ़ा देना चाहिए।

खीरे की फसल मे लगने वाले रोग एवं कीट (Diseases and pests of cucumber crop)

खीरा (Khira) की फसल मे भी कई तरह के रोग एवं कीट लगते है जिनमे प्रमुख्य कीट कद्दू का लाल कीट (रेड पंपकिन बिटिल), खीरे का फतंगा (डाइफेनीया इंडिका), माइट (लाल मकङी), सफेद मक्खी आदि कीट लगते है इन कीटों पर अगर समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो इसका बुङा प्रभाव हमारी फसल पर पङती है जो की हमारी उपज को प्रभावित करती है। इन कीटों के आलवा खीरा की फसल मे रोग का भी प्रकोप बना रहता है खीरा की फसल मे प्रमुख्य रोग चूर्णी फफूंद, मृदुरोमिल आसिता, खीरा मोजैक वायरस आदि जैसे रोग खीरा की फसल मे लगते है। इन सभी रोगों से बिना ज्यादा नुकसान के बचा जा सकता है बस जरूरत होती है फसल की अच्छी देखभाल। अच्छी देखभाल के साथ-साथ अगर किसान को किसी रोग का लक्षण दिखे तो शुरुआती लक्षण दिखते ही इसके रोकथाम का इंतजाम करना चाहिए।

Kheera ki kheti
Kheera ki kheti
खीरा की तूङाई (Cucumber Fruit Harvesting)

खीरा की खेती मे खीरा की तुड़ाई सही समय पर करना बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है खीरा की तुड़ाई उस समय करनी चाहिए जब फल कोमल एवं मुलायम अवस्था मे हो। फलों की तूङाई 2 से 3 दिनों के अंतराल पर करते रहना चाहिए।

खीरा की उपज (Cucumber yield)

खीरा की उपज खीरा की किस्म, खेत की मिट्टी की उर्वरता शक्ति, एवं इसकी कैसी देखभाल की गई है इस पर भी निर्भर करता है वैसे आमतौर पर इसकी उपज लगभग 15 से 35 टन प्रति हेक्टेयर तक होती है इसकी उपज पूरी तरह से इसकी किस्म पर निर्भर करती है।

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खीरे की खेती से संबंधित पूछे गए प्रश्न (FAQs)
जी, हाँ
Q. खीरा कैसे लगाया जाता है?
खीरा सीधे बीज से भी लगाया जाता हैं या तो फिर पहले खीरे की पौध को नर्सरी मे तैयार कर लिया जाता है उसके बाद खीरे को मुख्य खेत मे लगाया जाता हैं।
खीरा के बुआई होने के लगभग 2 महीने बाद खीरा फल देने लगता हैं।
Q. एक हेक्टेयर मे खीरा कितना उपज देता हैं?
आमतौर पर इसकी उपज लगभग 15 से 35 टन प्रति हेक्टेयर तक होती है इसकी उपज पूरी तरह से इसकी किस्म पर निर्भर करती है।

तो मुझे आशा है कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा, अगर आपको पसंद आया है तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे। और उन तक भी खीरे की खेती के बारे मे जानकारी पहुँचाए।

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