Monday, October 3, 2022

मछली पालन कैसे करें जानिए मछली पालन से जुङे अनेकों सवालों का जबाब – Fish Farming Business

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मछली पालन जिसे हमलोग Fish Farming के नाम से भी जानते है. हमारे देश मे मछली की मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसका मुख्य कारण देश की बढ़ती जनसंख्या भी हो सकती है हमारे देश की जनसंख्या 130 करोड़ से भी ज्यादा है जिसके कारण कही न कही मछली की मांग बढ़ी है और हमारे यहाँ देश की 60% आबादी मछली खाना पसंद करती है जिसकी वजह से भी मछली की मांग बढ़ी है।

हमारे देश मे मछली पालन लिए अब नए और आधुनिक तरीके आपनाए जा रहे है जिसकी मदद से मछली पालन करना काफी आसान हो गया है। वही अगर बात करें आज से कुछ वर्ष पहले की तो हमारे यहाँ मछली पालन के लिए ज्यादा तालाब नहीं हुआ करती थी जिसकी वजह से मछली का उत्पादन कम होता था। 

पहले के समय मे मछली बाजार मे नदी या समुद्रों से पकङ कर लाया जाता था जो की काफी जोखिम भरा काम था। लेकिन आज के आधुनिक युग मे मछली पालन करने के लिए कई ऐसी तकनीक विकसित हुई है जिसकी मदद से मछली पालन करना काफी आसान हो गया है इन्ही तकनीकों मे से एक है बायॉफ्लोक (Biofloc Fish Farming) मे मछली पालन करना। बायॉफ्लोक मछली पालन करने के लिए सबसे आधुनिकतम तरीकों में से एक हैं।


मछली पालन क्या है (Fish Farming Kya hai in hindi)

मछली पालन इसके नाम से ही जैसा की पता चलता है कि मछली पालन यानि की मछलियों को पालना. इसमे मछलियों को तालाब मे रखकर मछलियों के आकार को बङा किया जाता है और जब मछली पलकों को ये लगता है की अब इस मछली के साइज़ से हम अच्छे मुनाफे कमा सकते है तो मछली पालक इसे तालाब से निकालकर बाजार मे ले आते है।

इसमे भी दो तरह के बाते होते है जैसे की आप मछली किस उदेश्य से पालन कर रहे है इसे बङा कर खाने के लिए या तो फिर आप इससे मछली के बच्चों को उत्पादन लेना चाहते है। अगर आप मछली पालन मछली के बच्चों के उत्पादन के लिए कर रहे है तो इसमे भी मछली पलकों को काफी मुनाफा होता है।

Fish Farming Kya hai in hindi
Fish Farming Kya hai in hindi

आपने हेचरी नामक शब्द तो कभी न कभी सुना ही होगा ये दरअसल मछली पालन से ही संबंधित है। हेचरी उसे कहते है जहाँ से किसान मछली पालन करने के लिए मछली के बच्चों को लाते है और अपने तालाब या पोखर मे लाकर डाल देते है और अपनी तालाब मे मछली के साइज़ को बङा करते है।


मछली पालन क्यों करें (Fish Farming kyu karen)

अगर आप किसान है और आप खेती करते है तो ये मछली पालन करना आपके लिए अच्छा साबित हो सकता है। क्योंकि इसमे आपको इसके लिए अलग से समय देने की जरूरत नहीं पङती है। आप इसे खेती के कामों के साथ-साथ भी आसानी से कर सकते है. मछली पालन करके आप एक्स्ट्रा इंकम जेनरैट कर सकते है। 

हमारे देश मे ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया मे मछलियों की मांग बढ़ती जा रही है. वहीं मांग बढ़ने का मुख्य कारण मछली का स्वादिष्ट होना और इसमें उपस्थित कई प्रोटीन एवं विटामिन्स के स्रोतों का होना है. इसलिए विश्व स्तर पर इसका बाजार बढ़ता ही जा रहा है। जहाँ पहले सबसे बड़ा स्रोत समुद्र, नदियां एवं तालाब होते हैं. लेकिन बढ़ती तकनीक के साथ लोगों ने मछली पकड़ने के पुराने प्राकृतिक तरीके छोड़कर नए तरीके अपना लिए हैं। अब लोगों ने कृत्रिम रूप से तालाब या टैंकों का निर्माण करके मछली पालन शुरू कर दिया है। समुद्र, नदियां से मछलीयों को पाकङना मछुआरों के लिए काफी मशक्त का कार्य था और इसमे मछुआरों का जान का भी खतरा रहता था।

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कैसे शुरू करें मछली पालन (Fish Farming kaise shuru karen)

अगर आप मछली पालन शुरू करने का सोच रहे है तब आपको अगर हो सके तो सबसे पहले मछली पालन की प्रशिक्षण लेने का कोशिश करें। आपको ये प्रशिक्षण करने मे आपके जिले का कृषि विज्ञान केंद्र पूरी तरह से सहायता करेगी।

मछली पालन शुरू करने के लिए आपको तालाब या टैंक, मछली की नस्ल का चुनाव करना, मछलियों के खाने का इंतज़ाम, मछलियों की देखभाल, तालाब के आस-पास मे पानी की अच्छी सुबिधा आदि की आवश्यकता होती है।


Talab ka Nirman kaise karen
Talab ka Nirman kaise karen

मत्स्य पालन हेतु तालाब का निर्माण कैसे करें (Talab ka Nirman kaise karen)

मत्स्य पालको को तालाब बनाने से पहले कुछ बातों का ध्यान मे रखकर तालाब का निर्माण करना चाहिए।

  • अगर संभव हो तो तालाब निर्माण का कार्य वर्षा काल के पहले ही अच्छे मौसम मे करना अच्छा होता है। 
  • तालाब निर्माण करने के लिए मत्स्य पालको को ऐसी जगह का चुनाव करना चाहिए जहाँ पर बरसात का पानी, नदियों का पानी तालाब मे ना जा सके। 
  • रेतीली भूमि तथा बलुई भूमि मछली पालन हेतु अच्छी नहीं मानी जाती है। तलाब निर्माण के लिए चिकनी, बलुई तथा रेतीली मिट्टी का मिश्रण मछली पालन के लिए अच्छी मानी जाती है।
  • तालाब के निर्माण के समय इस बात का ध्यान रखे कि तालाब के तलहटी समतल तथा एक तरफ हल्का ढलान होना चाहिए। इससे मछलियों तथा जल की निकाशी करने मे आसानी होती है । 
  • तालाब की बांध बनाते समय मिट्टी की परत दर परत पानी का छीरकाव करके मिट्टी को अच्छी तरह से दबाना चाहिए। इससे बांध से पानी का रिसाव नहीं होगा. और बांध भी मजबूत बनेगा।
  • तालाब कि बांध की इतनी चौङाई होनी चाहिए जिससे की उसका कटाव नहीं हो सके। और मछली पालन से जुङी समान तथा मछलियों के आहार को ले जाने मे आसानी हो सके।
  • तालाब के पास मे जल का स्थाई स्त्रोत होना चाहिए जिससे की जब तालाब मे पानी कम हो तो आप तालाब मे आवश्यकता के अनुसार पानी डाल सके और बरसात के समय मे जब तालाब मे पानी ज्यादा हो जाए तो तालाब से पानी को आसानी से निकाल सके।
  • तालाब मे से पानी को निकालने के लिए तालाब का निर्माण करते समय बांध के मध्य ऊपरी भाग मे सीमेंट या पीवीसी पाइप लगाना चाहिए. इन पाइपों मे महीन जाली लगा देना चाहिए जिससे की मछलियाँ अंदर बाहर नहीं आ जा सके।
  • तालाब का निर्माण पूरी तरह से हो जाने के बाद तालाब मे चूने का छिड़काव अवश्य करें। चूने का छिड़काव करने से तालाब की पानी साफ होती है जो की मछली पालन के लिए अच्छा होता है। 

ऊपर दिए गए जानकारी उन मत्स्य पालको के लिए है जो कि तालाब मे मछली पालन करना चाहते है ऐसे मत्स्य पालक जो की बिना तालाब के निर्माण किए हुए मछली पालन करना चाहते है तो उन मत्स्य पालको को बायॉफ्लोक विधि से मछली पालन करना चाहिए। इस विधि मे मछली पालन करने के लिए तालाब की आवश्यकता नहीं होती है। इसे किसी भी समतल भूमि पर आसानी से किया जा सकता है।

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मछली पालन
मछली पालन
मछली पालन के तालाब की तैयारी (Fish Farming ke liye talab ki taiyari)

मछली पालन के लिए तालाब की तैयारी करना बहुत ही आवश्यक कार्य है अगर तालाब की तैयारी न किया जाए तो मत्स्य पलकों को काफी नुकसान का भी सामना करना पङ सकता है। तालाब की जल की गहराई 1.5-3.0 मीटर जल की गहराई होनी चाहिए। ऐसे तालाब जिनके जल का रंग बहुत ज्यादा काला, हरा अथवा लाल और जलकुंभी या अन्य वनस्पतियों से घिरा हो मछली पालन के लिए अच्छी नहीं होती है।

मत्स्य पलकों को अप्रैल-मई के महीने मे इन तालाबों से जल को निकालकर तलहटी की मिट्टी को काट कर निकल देंना चाहिए। जिन पुराने तालाबों से मिट्टी निकालना संभव नहीं है उनकी तलहटी की मिट्टी को किसी औजार या फावङे के माध्यम से पलट देना चाहिए। तालाब मे अतिअधिक वनस्पति होने से तालाब का एक बङा हिस्सा इन पौधों की वजह से घिर जाता है। जिससे मछली को अपनी नियमित जीवन के लिए घूमने-फिरने की असुविधा होती है जिससे की मछली के ग्रोथ पर प्रभाव पङती है।

तालाब की जल को हमेशा साफ तथा स्वच्छ रखना चाहिए जिससे की मछलियों को किसी भी प्रकार की बीमारी न हो और ऑक्सीजीन की भी कमी न हो सके।  


मछलियों की प्रजातियों का चुनाव (Selection of Fish Breeds)

मछलियों की प्रजातियों का चुनाव मछली पालन मे सबसे महत्वपूर्ण एवं आवश्यक माना जाता है इसका मुख्य वजह यह है कि अगर मत्स्य पालक मछलियों की प्रजातियों का चुनाव सही से नहीं कर पाते है तो इसका सीधा असर मछली की उत्पादकता पर पङती है जिससे मुनाफे पर गहङा असर पङता है।

हमारे देश मे रोहू, कटला, नैनी/मृगल, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प, देशी मंगुर, सिंघी एवं हिस्ला मछलियों की प्रजातियां ही मुख्य रूप से पायीं जाती हैं. इस तरह की प्रजातियां मानसून एवं परिस्थितियों के हिसाब से अपने आपको ढाल भी सकती है। मतलब ये की इन सब मछलियों की प्रजातियों का चयन करना मत्स्य पलकों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है। वहीं ये मछलियों की प्रजातियां आसानी से किसी भी मत्स्य हेचरी मे मिल जाती है इसलिए इनके दाम भी कम होते हैं।


मछलियों का रख रखाव कैसे करें (How to take care of fish)

मछली पालन मे मछलियों का खास रख रखाव की आवश्यकता होती है. इसके लिए एक समय का निर्धारण कर सकते है जिसमे की मछलियों को दाना(खाना) कब देना है। इसके अलावा मछलियों को सुरक्षित रखना भी काफी महत्वपूर्ण होता है. बीच-बीच मे मत्स्य पलकों को तालाब मे जाल डालकर देखना होता है कि किसी मछली मे किसी भी प्रकार का कोई बीमारी तो नहीं न है। 

मछलियों मे प्रायः अगर किसी रोग का लक्षण हो तो मछलियों की हलचल मे सुस्ती आ जाती है। मछलियों मे होने वाले रोग जैसे कि मछलियों के शरीर पर दाग पङना, पंखों का सङना, शरीर का सूजना, मछली का जल की सतह पर आना, मछलियों के चमङी का ढीला पङना आदि जैसे लक्षण दिखे तो मत्स्य पलकों को इसकी उपचार करने की व्यवस्ता करनी चाहिए। और रोग से ग्राक्षित मछलियों को तालाब से निकाल देना चाहिए ताकि जो मछलिया स्वस्थ है उन तक ये बीमारी न पहुँचे।

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मत्स्य पालन
मत्स्य पालन

मछलियों का भोजन (fish meal)

मत्स्य पालन मे मछलियों का भोजन बहुत ही उपयोगी माना जाता है क्योंकि मछलियों का ग्रोथ इसकी भोजन पर ही निर्भर करती है मछलियों का प्राकृतिक आहार तो तालब मे ही होता है जैसे – अर्ध सङी-गली वनस्पतिया, जन्तु अवशेष, जन्तु प्लवक, कोमल जलिये घास आदि इन सभी प्राकृतिक आहार को तो मछलियाँ खाती ही है तथा अगर आप इसके साथ मे पूरक आहार के रूप मे सरसों की खल्ली, राइसब्रान, सोयाबीन की खल्ली आदि मछलियों के आहार के रूप मे देते है तो मछलियों का ग्रोथ अधिक होगा।

मछलियों का कृत्रिम भोजन जिस प्रकार मुर्गी या पशुओ को खिलाने के लिए मुर्गी दाना या पशु आहार बाजार मे आसानी से मिल जाती है ठिक उसी प्रकार मछलियों को खिलाने के लिए भी कई कंपनियां मछली चारा का निर्माण करती है। जो की बाजार मे आसानी से मिल जाती है।


मछली पालन से लाभ (Fish Farming se labh)

  • अगर आप किसान है और आप खेती करते है तो ऐसे मे आपको मत्स्य पालन एक एक्स्ट्रा इंकम का जरिया बन सकता है। आपको इसके लिए कुछ ज्यादा करने की आवश्यकता नहीं होती है आप खेती-बाड़ी के साथ-साथ मछली पालन भी आसानी से कर सकते है। इसके लिए आपको कुछ समय देना होता है।
  • मत्स्य पलकों को मछलियों को बेचने के लिए खास प्रकार की बाजार की भी आवश्यकता नहीं होती है इसे लोकल मार्केट मे भी आसानी से बेच सकते है। 
  • मत्स्य पालन कम लागत मे भी शुरू कर सकते है इसमे कुछ ज्यादा निवेश की भी आवश्यकता नहीं होती है। 
  • मत्स्य पालन करने वालों किसानों को सरकार की तरफ से कई प्रकार की योजनाओ का लाभ मिलता है जिसका लाभ लेकर मत्स्य पालक मछली पालन करना शुरू कर सकते है। 
  • सरकारी स्तर पर मछली पालन पर कई प्रकार के अनुदान तथा प्ररशिक्षण (Training) की भी व्यवस्था की गई। जिसका लाभ लेकर मत्स्य पालक मछली पालन मे कुछ अच्छा कर सकते है और इससे मुनाफे कमा सकते है।
  • मछली मे काफी अच्छी मात्रा में प्रोटीन पाई जाती है जिसके कारण मांसाहारी लोग इसे काफी पसंद करते है यही वजह है की इसकी मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जो की मत्स्य पलकों के लिए अच्छा माना जाता है।

मछली पालन पर लोन (Fish Farming par loan)

मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई प्रकार की योजनाओ की शुरुआत की है इन्ही योजनाओ मे से एक है मत्स्य संपदा योजना। मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत की गई है, जिसे पूरे देश में लागू किया गया है. इसे ब्ल्यू रेवोल्यूशन कहा गया है. योजना के अन्तर्गत मत्स्य पालक, मछली बेचने वाले, स्वयं सहायता समूह, मत्स्य उधमी, फिश फार्मर आदि को इस योजना के माध्यम से लाभ मिलता है।

मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए तथा किसानों की आय को दोगुना करने के लिए सरकार के माध्यम से कई प्रकार का योजनाओ का शुरुआत की गई है जिसमे कि अगर कोई किसान तालाब का निर्माण करता है तब तालाब का निर्माण करने के लिए सब्सिडी भी दी जाती है जिसका लाभ लेकर मत्स्य पालक तालाब का निर्माण कर सकते है। और सरकार के माध्यम से मछली पालन करने के लिए लोन की भी व्यवस्था की गई है। जिसका लाभ लेकर किसान आसानी से मछली पालन कर सकते है। और इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते है।

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Frequently Asked Questions (FAQs)

Q. मछली पालन का प्रशिक्षण लेने के लिए क्या करना होगा ?

अगर कोई मत्स्य पालक मछली पालन का प्रशिक्षण लेना चाहता है तो इसके लिए जिले के कृषि विज्ञान केंद्र उन कृषकों को प्रशिक्षण मे मदद कर सकता है।

Q. मछली पालन में हार्वेस्टिंग का क्या अर्थ है ?

मछली पालन मे हार्वेस्टिंग का मतलब होता है कि जब आपकी मछली का साइज़ मुनाफे देने लायक हो जाता है तब मत्स्य पालक इसे तालाब से निकालकर बेच देते है। इसे आप ऐसे भी समझ सकते है कि जब आपकी फसल तैयार हो जाती है तब आप उसकी कटाई करते है और उससे आनज निकाल लेते है तो उसे ही हार्वेस्टिंग कहते है।

Q. मछली का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन सा है ?

हमारे देश मे आंध्र प्रदेश में सर्वाधिक 34.50 लाख टन अंतर्देशीय मछली का उत्‍पादन किया है, जबकि गुजरात देश में समुद्री मछली का सबसे बड़ा (7.01 लाख टन) उत्‍पादक राज्‍य है।

Q. भारत में मछली पालन की विभिन्न नस्लों के नाम

हमारे देश मे रोहू, कटला, नैनी/मृगल, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प, देशी मंगुर, सिंघी एवं हिस्ला मछलियों की प्रजातियां ही मुख्य रूप से पायीं जाती हैं। 

Q. मछली पालन का बीज कहां मिलेगा ?

मछली पालन के लिए मछली के बच्चे आप आपने शहर के नजदीकी हेचरी से ला सकते है या तो फिर आप अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते है।

Q. कौन सी डिग्री के द्वारा मछली पालन संभव है ?

आपको मछली पालन के लिए किसी भी डिग्री की आवश्यकता नहीं होती है बस आपको मछली पालन के प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। अगर आप इस क्षेत्र मे पढ़ाई करना चाहते है या कोई डिग्री हासिल करना चाहते है तो इसके लिए Fisheries से B.F.Sc. मे Graduation कर सकते है। और अगर आप आगे की पढ़ाई करना चाहते है तो इसके लिए FISHERIES SCIENCE से Post Graduation या पीएचडी भी कर सकते है।

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तो दोस्तों मुझे आशा है कि आपको मछली पालन से जुड़ी जानकारी पसंद आयी होगी इस पोस्ट मे मछली पालन क्या है, मछली पालन क्यों करें, कैसे शुरू करें मछली पालन, मत्स्य पालन हेतु तालाब का निर्माण कैसे करें, मछली पालन से जुङे अनेकों सवालों का जबाब दि गई है। अगर आपको इस पोस्ट से संबंधित कोई भीं सवाल हो तो आप हमसे कमेंट सेक्शन में पूछ सकते है।

तो दोस्तों मुझे आशा है कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा, अगर आपको पसंद आया है तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे | और उन तक भी मछली पालन (Fish Farming) की जानकारी पहुँचाए।

धन्यबाद

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