Tuesday, October 4, 2022

बकरी पालन से कम खर्च में पाएं अधिक मुनाफा – Goat Farming Business

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गरीब हो या उधमी सबके लिए है बकरी पालन (Goat Farming) मे आपर संभावनाए है। प्राचीन काल से ही बकरी पालन ग्रामीणों कि आर्थिक स्थिति को सुधारने मे काफी मददगार साबित हुआ है। बकरी को गरीब की गाय भी कहा जाता है हमारे देश के किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन करते है जिसमे बकरी पालन भी किसानों के खेती के साथ-साथ कम खर्च में अधिक मुनाफा देने वाला एक अच्छा व्यवसाय है। बकरी एक बहुपयोगी पशु है जिससे बकरी पलकों को  दूध, मांस, चमङे आदि की प्राप्ति होती है। ये देश में भूमिहीन, छोटे और सीमांत किसानों को भरण पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

हमारे देश के भूमिहीन, छोटे और सीमांत किसान अतिरिक्त आय के लिए पशुपालन का सहारा लेते है जिसमे मुर्गी पालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन के अलावा बकरी पालन का भी काम कई वर्षों से करते आ रहे है। बकरी पालन की सबसे अच्छी बात ये है कि इसे छोटी से छोटी जगह पर तथा खाने एवं खिलाने मे खर्च कम आता है इसी कारण से किसान आसानी से बकरी पालन कर लेते है।

बकरी पालन सहज तथा हल्का होने के कारण महिलाये भी बकरी पालन आसानी से कर सकती है और अपने परिवार के लिए एक अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती है। बकरी पालन को बढ़वा देने के लिए सरकारी स्तर पर भी कई प्रकार के अनुदान एवं प्रशिक्षण की भी व्यवस्था है। जिसका लाभ लेकर बकरी पालन आसानी से कर सकते है।


बकरी पालन क्या हैं (Bakri palan kya hai in hindi)

बकरी पालन को Goat Farming के नाम से भी जाना जाता है बकरी पालन जिस तरह से गाय, भैस को दूध के लिए पाला जाता है ठिक उसी प्रकार से बकरी को दूध, मांस, चमङे आदि के लिए पाला जाता है। बकरी गाय भैस से छोटा जानवर होने के कारण इसके रख-रखाव मे लागत भी कम आता है इसकी देखभाल का कार्य घर की महिलाये एवं बच्चे भी कर लेती है। इसके खाने के लिए भी ज्यादा खर्च की आवश्यकता नहीं होती है इसे बकरी पालक खेतो मे ले जाकर घास को चारे के रूम खिला सकते है। बकरियाँ हरे हरे घास खूब खाना पसंद करती है।

बकरियाँ आमतौर पर जंगल झाङी, रास्ते के किनारे और खेत-मैदान मे घूम-फिर कर अपना पेट भरती है। बकरी के कुछ नस्ल ऐसे होते है जिनको गाय की तरह चौबीस घंटा खूँटी से बांधकर अच्छा से अच्छा चारा खिलाने के बावजूद पालना आसान नहीं होता है। लेकिन बारबारी और सिरोही नस्ल की बकरियाँ को बांधकर पाला जा सकता है।

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Goat
बकरी पालन

बकरी पालन कैसे करें (bakri palan kaise kare in hindi)

बकरी पालन शुरू करना बिल्कुल ही आसान है इस व्यवसाय को शुरू करने मे न तो ज्यादा लागत आती है और नाही ज्यादा जमीन की जरूरत होती है। बकरी पालन शुरू करने के लिए सबसे पहले तो आपके पास बकरी के लिए घर (बाङे) यानि की जहाँ पर आप बकरी को रख सकते है। उसके बाद आप बकरी के नस्लों का चयन अपने हिसाब और अपने अनुकूल वातावरण को देखते हुए करना है। बकरी के नस्लों का चुनाव करते समय आप इस बात का ध्यान रखे की आपको किस तरह के नस्ल की बकरियों को पालन है कुछ ऐसे किस्म के बकरी होते है जिन्हे खूटे से बांधकर भी पाला जा सकता है।

बकरियों के लिए आहार की व्यवस्था करना एवं साफ पानी का इंतजाम करना। अगर आपने बकरियों के ऐसे नस्ल का चुनाव किया है जिसे खूटे पर बांधकर नहीं पाला जा सकता है तो ऐसे बकरियों के नस्ल आमतौर पर जंगल झाङी, रास्ते के किनारे, खेत मैदान मे घूम फिर कर पेट भरती है। तो ऐसे बकरियों के किस्मों के लिए बकरियों के देखभाल करना आवश्यक होता है।


बकरी पालन हेतु आवश्यक वस्तुए

बकरी पालन के लिए कुछ चीजे की जरूरत होती है जिसकी मदद से बकरी पालन आसानी से किया जा सकता है। बकरी पालन के लिए बकरियों के लिए जहाँ पर बकरियों को रखा जाए उसे लिए आश्रय की जरूरत होती है। इसे घर मे भी आसानी से रखा जा सकता है। अगर आप बङे पैमाने पर बकरी पालन की सोच रहे है तब आपको इसके लिए बकरियों के बाङे का निर्माण करना होगा अगर आप इसे छोटे पैमाने पर करना चाहते है तो आप इसे घर पर भी कर सकते है।

बकरियों के लिए खाने और पानी का इंतजाम करना। बकरियों के समुचित विकास के लिए मुख्य रूप से तीन प्रकार का आहार दिया जाता है – हरा चारा, सूखा चारा और दाना आदि। 

हरा चारा – बकरियों के आहार मे हरे चारे का विशेष महत्व है इसमे पोषक तत्व के रूप मे प्रोटीन, खनिज, लवण और विटामिन भरपूर मात्रा मे पाया जाता है। जो की बकरियों के वृद्धि विकाश के लिए अच्छा होता है । हरा चारा के रूप मे जंगली घास, पेङ-पौधों की पत्तियां और फलियां, सब्जी के पत्ते, सब्जी के छिलके आदि इसके आलवा किसान अपने खेत मे हरे चारे को उगाकर भी खिला सकते है हरे चारे मे जैसे बरसिम घास, रिजका, लोबिया, मक्का, ज्वार आदि।

सूखा चारा – बकरियाँ सूखा चारा के रूप मे अरहर, चना, मटर का भूसा, मूंग और उरद की सुखी पत्तियां, बरसिम या रिजका का सूखा चारा बकरियाँ खूब चाव से खाती है। बकरियों को गेहूँ का भूसा खिलना है तो भूसे को थोङा पानी मे मिलकर खिलाने से भूसा के स्वाद मे बढ़ोतरी होती है जिससे बकरियाँ इसे भी बहुत चाव से खाती है अगर आप इस भूसे मे थोङा दाना या चोकर का उपयोग करते है तो बकरियाँ इसे भी खूब पसंद करती है। सूखे चारे के रूप मे बकरियों को बरसिम, रिजका, लोबिया, मकई, नेपियर को सुखाकर रखा गया हो तो ये बकरियों के लिए काफी अच्छा भोजन का काम करता है। 

दाना – बकरियों के बेहतर स्वस्थ के लिए हरा एवं सूखा चारा के साथ-साथ दाना का मिश्रण देना अच्छा होता है। इसमे प्रोटीन, विटामिन और खनिज लवण भरपूर मात्रा मे होने के कारण ये बकरियों के स्वस्थ के लिए अच्छा होता है।

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बकरियों की नस्लें

भारतीय बकरियों के नस्ल

नस्ल स्थान
बारबरी इस नस्ल की बकरियाँ उत्तरप्रदेश एवं राजस्थान मे पाई जाती है ।
मारवारी राजस्थान एवं गुजरात
जमुनापरी उत्तर प्रदेश (एटवा एवं आगरा)
ब्लैक बंगाल पशिचम बंगाल एवं आसाम
मालवार
संगमनेरी
बीटल पंजाब एवं हरियाणा
जाकरना
सिरोही गुजरात एवं राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों
कश्मीरी
विदेशी बकरियों के नस्ल
नस्ल स्थान
अल्पाइन फ्रांस देश के आल्पस पवर्त शृंखला
एंग्लोनुवियन यूरोप के विभिन्न देशों में
सानन स्विटजरलैंड
टोगेनवर्ग स्विटजरलैंड

बारबरी

इस नस्ल की बकरियाँ उत्तरप्रदेश एवं राजस्थान मे पाई जाती है। इस नस्ल की बकरियों का कद छोटा, छोटे कान, छोटे सिंग तथा रंग ज्यादातर सफेद या भूरा होता है। इस नस्ल की बकरियों को घर मे रखकर पाला जा सकता है।

सिरोही

इस नस्ल की बकरियाँ गुजरात एवं राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों मे पाई जाती है। इसका शरीर गठीला एवं रंग सफेद, भूरा या सफेद एवं भूरा का मिश्रण लिये होता है। इस नस्ल की बकरियाँ दूध उत्पादन हेतु पाली जाती है लेकिन मांस उत्पादन के लिए भी यह उपयुक्त है।  इस नस्ल की बकरियों को बिना चराये भी पाला जा सकता है। यानि की इसे बांधकर पाला जा सकता है।

बीटल

इस नस्ल की बकरियाँ पंजाब एवं हरियाणा के क्षेत्रों मे ज्यादा पाई जाती है। इसका शरीर का आकार बङा, काला भूरा रंग होता है। यह दिखने मे जमुनापारी बकरियाँ जैसी लगती है परन्तु ऊँचाई एवं वजन की तुलना में जमुनापारी से छोटी होती है।

जमुनापरी

इस नस्ल की बकरियाँ उत्तर प्रदेश (एटवा एवं आगरा) मे पाई जाती है। इस नस्ल की बकरियों का आकार बङा होता है, इसके नाक काफी उभरे रहते हैं। जिसे ‘रोमन’ नाक कहते हैं। सींग छोटा एवं चौड़ा होता है। इस नस्ल की बकरियों के पिछली टांगों पर घने लंबे बाल होते है। इसके शरीर पर सफेद एवं लाल रंग के लम्बे बाल पाये जाते हैं। इसका शरीर बेलनाकार होता है।

ब्लैक बंगाल

इस नस्ल की बकरियाँ पशिचम बंगाल एवं आसाम मे पाई जाती है। इस नस्ल की बकरियों का कद छोटा और रंग काला/भूरा होता है। तथा इसके कान छोटे तथा चपटे होते है। इसका शरीर गठीला होने के साथ-साथ आगे से पीछे की ओर ज्यादा चौड़ा तथा बीच में अधिक मोटा होता है।

मारवारी

इस नस्ल की बकरियाँ राजस्थान एवं गुजरात मे पाई जाती है। इस नस्ल की बकरियों का शरीर माध्यम आकार का एवं शरीर लंबे बालों से ढका होता है तथा इसके चपटे कान, सिंग छोटे नुकीले पीछे की ओर मूङे होते है।

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बकरी पालन के लिए बकरी घर यानि बाङे का निर्माण

अगर आप बकरी पालन को व्यावासायिक तौर पर करना चाहते है तो इसके लिए आपको बकरी घर का निर्माण करना होगा बकरियों को रखने के लिए। आमतौर पर दस बकरियों को रखने के लिए बकरी घर का चौङाई करीब 15 से 20 फीट तथा ऊंचाई करीब 10 से 15 फीट होनी चाहिए। बकरी के संख्या के अनुसार बकरीघर का लंबाई, चौङाई बढ़ाई या घटाई जा सकती है। बकरी घर का निर्माण कुछ इस तरह से करवाए कि इसमे हवा आसानी से आ जा सके और ठंड का समय आने पर इसको आसानी से बंद किया जा सके।

बकरी घर के पास बकरियों के लिए पीने योग्य पानी की अच्छी व्यवस्ता करें जिससे की बकरियों को पानी पीने के लिए ज्यादा दूर न जाना पङे। बकरी घर को समय समय पर साफ करते रहना चाहिए। जिससे की बकरियों को किसी भी प्रकार का बीमारी न हो पाए। बकरियों के मल-मूत्र का साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए। आपको इस बात का खास ध्यान देना चाहिए की बकरी घर मे बकरियों की संख्या ज्यादा न पाए।


बकरी पालन से लाभ

  • बकरी पालन मे बकरियों का खाने या खिलाने का खर्च बहुत कम आता है।
  • बकरी पालन खेती-किसानी के साथ-साथ एक अतिरिक्त आय का साधन हो सकता है। 
  • कम पूँजी, थोंङी सी जमीन की आवश्यकता होने के कारण बकरी पालन एक अच्छा व्यवसाय है।
  • इस व्यवसाय का सहज और हल्का होने के कारण महिलाये भी इसे बहुत ही आसानी से अपना सकती है और इससे अतिरिक्त आय का स्रोत बना सकती है। 
  • सरकार की तरफ से भी बकरी पलकों को समय-समय पर अनुदान और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है जिसका लाभ लेकर बकरी पालक बकरी पालन का व्यवसाय आसानी से शुरू कर सकते है। 
  • बकरियों के कुछ नस्ल ऐसे होते है जिनको चङाने की आवश्यकता नहीं होती है बारबारी और सिरोही नस्ल की बकरी को आसानी से बांधकर पाला जा सकता है। 
  • किसी आवश्यक जरूरत पङने पर बकरियों को बेचकर आसानी से नगद पैसा प्राप्त किया जा सकता है। बकरियों को बेचने के लिए स्थानीये स्तर पर बाजार उपलब्ध होते है।
  • बकरी के बच्चों को बङा करके आसानी से कभी भी बेचा जा सकता है बकङे एवं बकरी के मांस की ज्यादा मांग होने के कारण इसकी कीमत भी बकरी पलकों को अच्छी मिलती है। 

बकरी पालन में लागत कम और मुनाफा ज्यादा

ज्यादातर बकरी पालक बकरी के नस्ल का चुनाव अपने मुनाफा को देखते हुए करते है अगर कोई बकरी पालक मांस के उदेश्य से बकरी का पालन करता है तो उन बकरी पलकों के लिए ब्लेक बंगाल, उस्मानाबादी, मारवाडी, मेहसाना, संगमनेरी, कच्छी तथा सिरोही नस्लें अच्छी मानी जाती है। वही अगर कोई बकरी पालक ऊन का उत्पादन लेने के लिए बकरियों का पालन करता है तो इसके लिए कश्मीरी, चाँगथाँग, गद्दी, चेगू आदि नस्ले ऊन के उत्पादन के लिए अच्छी मानी जाती है। अगर बात करें दूध की दृष्टि से जमुनापारी, सूरती, जखराना, बरबरी और बीटल आदि नस्लें दुधारू बकरी के नस्लों से जाना जाता है। 

बकरी पालन मे लागत कम होने का मुख्य कारण बकरियों के आहार मे लागत का कम लगना। बकरियाँ आमतौर पर जंगल झाङी, रास्ते के किनारे और खेत-मैदान मे घूम-फिर कर अपना पेट भरती है इसे गाय की तरह चौबीस घंटे खूटे से बांधकर खिलाने की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन बकरियों का कुछ नस्ल ऐसी भी होती है जिसे बकरी पालक खूटे पर बांधकर बकरी पालन करते है।

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bakri palan kaise kare in hindi
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बकरी पालन क्यों करनी चाहिए (bakri palan kyu karni chahiye in hindi)

अगर आप चाहते है किसी काम को करते हुए कम लागत मे कोई अतिरिक्त आय का स्रोत तो बकरी पालन आपके लिए आय का एक अच्छा अतिरिक्त स्त्रोत हो सकता है। जो किसान खेती करते है उनके लिए भी बकरी पालन आय का एक अच्छा स्त्रोत हो सकता है वो खेती-किसानी के कामों को करते हुए भी बकरी पालन कर सकते है। बकरी पालन मे शुरूआत का खर्च बहुत ही कम होता है जिससे की आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग भी कर सकते है। अगर बकरियों के लिए आहार की बात करें तो किसी भी दूसरे पशु की तुलना में इसमे कम खर्च करना पड़ता है। 

छोटे और सीमांत किसान अतिरिक्त आय के लिए पशुपालन का सहारा बहुत साल पहले से ही ले रहे है। किसान मुर्गी पालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन के अलावा बकरी पालन का काम सदियों से करते आ रहा है। बकरी पालन के साथ सबसे अच्छी बात है ये है की इसे कम स्थान और कम खर्च में किया जा सकता है। इसी कारण किसान आसानी से बकरी पालन कर लेते हैं और उन्हें कोई परेशानी नहीं होती. कम देखभाल के बाद किसान बकरी पालन से अच्छा मुनाफा कमाते है।


बकरी की दूध की खासियत

अपने कभी न कभी ये सुना ही होगा की जिसे डेंगू नामक बीमारी होती है तो डॉक्टर ये सलाह देते है बकरी के दूध का सेवन करने के लिए दरअसल कहा जाता है कि बकरी का दूध डेंगू में फायदेमंद होता है और इससे डेंगू को खत्म करने में काफी मदद मिलती है। डेंगू बीमारी मे बुखार के साथ-साथ शरीर मे प्लेटलेट्स की संख्या काफी कम हो जाती है जिससे डेंगू के मरीजों को इस बीमारी से ठिक होने मे काफी समय लगता है हालांकि इस दौरान बकरी का दूध प्लेटलेट्स बढ़ाता है। बकरी का दूध प्लेटलेट्स बढ़ाने में काफी मदद करता है।

बकरी के दूध मे कई तरह के पोषक तत्व भरपूर मात्रा मे पाया जाता है। इसमें कैल्शियम, विटामिन बी, फास्फोरस और पोटैशियम पाया जाता है। बकरी के दूध का सेवन करने से इम्यूनिटी अच्छी रहती है तथा ये इम्यून सिस्टम व मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने का कार्य भी करता है। बकरी का दूध मानव शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है।


Important: अगर आप बकरी पालन शुरू करना चाहते है तो आपको सबसे पहले बकरी पालन का प्रशिक्षण करना चाहिए। अगर आप बकरी पालन मे प्रशिक्षण लेना चाहते है तो बकरी पालन के प्रशिक्षण मे आपकी राज्य के कृषि विश्वविद्यालय या आपके जिले के कृषि विज्ञान केंद्र आपकी मदद कर सकता है। या तो फिर प्रशिक्षण की और अधिक जानकारी के लिए केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान की आधिकारिक वेबसाईट पर जाकर प्रशिक्षण से जुङी जानकारी प्राप्त कर सकते है।

केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान आधिकारिक वेबसाईट – https://www.cirg.res.in/


Frequently Asked Questions (FAQs

Q. गांव में बकरी पालन कैसे करें ?
गाँव मे बकरी पालन करने के सबसे पहले तो आपके पास बकरी के लिए घर (बाङे) यानि की जहाँ पर आप बकरी को रख सकते है। उसके बाद आप बकरी के नस्लों का चयन अपने हिसाब और अपने अनुकूल वातावरण को देखते हुए करना है। बकरी के नस्लों का चुनाव करते समय आप इस बात का ध्यान रखे की आपको किस तरह के नस्ल की बकरियों को पालन है कुछ ऐसे किस्म के बकरी के किस्म होते है जिन्हे खूटे से बांधकर भी पाला जा सकता है।

बकरियों के लिए आहार की व्यवस्था करना एवं साफ पानी का इंतजाम करना। अगर आपने बकरियों के ऐसे नस्ल का चुनाव किया है जिसे खूटे पर बांधकर नहीं पाला जा सकता है तो ऐसे बकरियों के नस्लों आमतौर पर जंगल झाङी, रास्ते के किनारे, खेत मैदान मे घूम फिर कर पेट भरती है। इस तरह से आप गाँव मे बकरी पालन कर सकते है। 

Q. बकरी पालन के लिए कितनी जगह चाहिए ?
बकरी पालन के लिए जगह की बात करे तो ऐसा माना गया है की प्रति बकरी के लिए 12 वर्ग फीट स्थान की आवश्यकता होती है वहीं बकरा के रहने के लिए 7 x 5 फिट जबकि गर्ववती बकरी के लिए 5 x 5 फिट स्थान की जरूरत होती है । बकरी के बच्चे के लिए 8 वर्ग फीट स्थान होना चाहिए।

वैसे अगर आप 100 बकरियों के लिए बकरी घर का निर्माण कर रहे है तब आप करीब 60×20 फिट का घर बनाना सही होता है अगर आप चाहे तब इसमे दुगुना स्थान भी छोङ सकते है इससे आपकी बकरियाँ स्वेच्छानुसार घूम-घूमकर अपना आहार ग्रहण कर सके। और अंदर बाहर आ जा सके।

Q. बकरी पालन में क्या फायदा है ?
छोटे और सीमांत किसान अतिरिक्त आय के लिए पशुपालन का सहारा बहुत साल पहले से ही ले रहे है। किसान मुर्गी पालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन के अलावा बकरी पालन का काम सदियों से करते आ रहा है। बकरी पालन से अनेकों फायदे है इससे लाभ की बात करे तो इस व्यवसाय को शुरू करने मे ज्यादा लागत की आवश्यकता नहीं होती है और नाही ज्यादा जगह की आवश्यकता होती है। इसी कारण किसान आसानी से बकरी पालन कर लेते हैं और उन्हें कोई परेशानी नहीं होती. कम देखभाल के बाद किसान बकरी पालन से अच्छा मुनाफा कमाते है।
Q. जमुनापारी बकरी की पहचान कैसे करें ?
जमुनापुरी नस्ल की बकरियों का आकार बङा होता है, इसके नाक काफी उभरे रहते हैं। जिसे ‘रोमन’ नाक कहते हैं। सींग छोटा एवं चौड़ा होता है। इस नस्ल की बकरियों के पिछली टांगों पर घने लंबे बाल होते है। इसके शरीर पर सफेद एवं लाल रंग के लम्बे बाल पाये जाते हैं। इसका शरीर बेलनाकार होता है।
Q. बकरी पालन में कितना खर्च आता है ?
बकरी पालन मे कितना खर्च आता है ये तो आप पर निर्भर करता है की आप इसे कितने बङे पैमाने पर शुरू करते है आप इसे छोटे पैमाने पर शुरू करेगे तो इसमे कम खर्च आएगे। आप कौन सी नस्ल की बकरी पालन करना चाहते है क्योंकि हर नस्ल की अपनी-अपनी खासियत है और अपनी-अपनी अलग-अलग कीमत है। वैसे बकरी पालन बहुत कम लागत मे शुरू होने वाला व्यवसाय है।

तो दोस्तों मुझे आशा है कि आपको बकरी पालन (Goat Farming) से जुड़ी जानकारी पसंद आयी होगी इस पोस्ट मे बकरी पालन क्या है, बकरी पालन हेतु आवश्यक वस्तुए, बकरियों की नस्लें, भारतीय बकरियों के नस्ल, विदेशी बकरियों के नस्ल, बकरी पालन के लिए बकरी घर यानि बाङे का निर्माण, बकरी पालन से लाभ, बकरी पालन में लागत कम और मुनाफा ज्यादा, बकरी पालन क्यों करनी चाहिए, बकरी की दूध की खासियत से जुङे जानकारी दि गई है। अगर आपको इस पोस्ट से संबंधित कोई भीं सवाल हो तो आप हमसे कमेंट सेक्शन में पूछ सकते है।

तो दोस्तों मुझे आशा है कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा, अगर आपको पसंद आया है तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे। और उन तक भी बकरी पालन के बारे मे जानकारी पहुँचाए।

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धन्यबाद

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