Monday, October 3, 2022

मुर्गी पालन से कम खर्च में पाएं अधिक मुनाफा – Poultry Farming Business

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गरीब हो या उधमी सबके लिए है मुर्गी पालन (Poultry Farming) मे आपर संभावनाए। प्राचीन काल से ही मुर्गी पालन ग्रामीणों कि आर्थिक स्थिति को सुधारने मे काफी मददगार साबित हुआ है। हमारे देश के किसान अपने आय को बढ़ाने के लिए प्राचीन काल से ही पशुपालन करते आ रहे है। कम लागत मे शुरू होने वाले पशुपालन व्यवसाय को किसान अपने क्षमता के आनुसार व्यवसाय मे पैसे का निवेश करके व्यवसाय को शुरू करते है।

पिछले कुछ वर्षों मे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुधारने मे मुर्गी पालन का बहुत ही अच्छा योगदान रहा है मुर्गी पालन ग्रामीण समुदाय को अजीविका, प्रोटीन युक्त खाद्य तथा स्वरोजगार प्रदान करने मे अहम भूमिका निभा रही है। मुर्गी पालन के व्यवसाय की अच्छी बात यह है की इस व्यवसाय को आरंभ करने के लिए ज्यादा पूँजी की आवश्यकता नहीं होती है तथा इस व्यवसाय से जल्दी और अच्छा मुनाफा प्राप्त होता है।

प्राचीन काल से ग्रामीण परिवार अपने घर के आँगन मे या घर के पीछे खाली स्थान मे परंपरिक तरीकों से मुर्गी पालन करते हुए आ रहे है इसमे 10 से 20 मुर्गियों का एक समूह एक परिवार के द्वारा पाला जाता है जो घर एवं उसके आस पास अनाज के गिरे दाने, झाङ-फूसो के बीच के कीङे-मकौङे, घास की कोमल पत्तीयां तथा घर के जूठन आदि खाकर अपना पेट भरती है। जिससे की इस तरह से मुर्गी पालन करने मे इसके रख-रखाव एवं खाने पीने पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता है। और मुर्गी से ग्रामीण परिवारों को कुछ मात्रा मे मांस और इससे अंडे प्राप्त हो जाते है जिसे बेचकर अतिरिक्त आय भी हो जाती है।

मुर्गी पालन क्या है (Murgi palan kya hai in hindi)

मुर्गी पालन को Poultry Farming या कुक्कुट पालन के नाम से भी जाना जाता है। मुर्गी पालन मे मुर्गी के चूजा यानि की मुर्गी के बच्चे को फार्म मे लाकर पाला जाता है मुर्गी पालने का मुख्य उदेश्य अंडा उत्पादन के लिए, मांस उत्पादन एवं चूजा उत्पादन के लिए मुर्गी पालन किया जाता है। मुर्गी पालक कम लागत मे इस व्यवसाय को शुरू करके इससे अच्छे मुनाफे कमाते है क्योंकि मुर्गी की अंडों एवं मुर्गी की मांस की मांग बाजारों मे अच्छी है मांशहारी लोग इसे खूब पसंद करते है।


Poultry Farming Business
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मुर्गी के नस्ल

नस्ल खासियत प्रति वर्ष अंडा उत्पादन
कङकनाथ बेहतर अनुकूलनशीलता और अच्छा और स्वादिष्ट मांस  80 अंडे
निकोबारी अंडा उत्पादन के किए उपयुक्त 150 से 160
तेल्लीचेरी इस नस्ल की मुर्गियाँ केरल मे पाई जाती है। 60 से 80 अंडे
मिरी 10 महीने मे मुर्गी के शरीर का वजन 1 से 1.3 किलोग्राम 60 से 70 अंडे
कश्मीर फेवीरोल्ला यह नस्ल मांस और अंडे के लिए उपयुक्त है। ———
असील यह नस्ल की मुर्गी 3 से 4 किलोग्राम तक की होती है। 80 से 90 अंडे
बुसरा इस नस्ल की मुर्गियाँ आकार मे छोटे एवं माध्यम आकार की होती है। 40 से 55 अंडे
अंकलेश्वर इस नस्ल की मुर्गियाँ कम लागत मे तैयार हो जाती है। 70 से 80 अंडे
पंजाब ब्राउन ये द्विउदेशय वाली नस्ल है। 60 से 80 अंडे
उत्तरा इस नस्ल के मुर्गियों के पैर पंखों से ढके होते है। 125 से 160 अंडे

मुर्गी पालन कैसे करें (Murgi palan kaise kare)

आज के आधुनिक युग मे खेती किसानी के साथ कई ऐसे उद्योग धंधे विकसित हो गये है। जो किसान खेती-किसानी से साथ-साथ कर के एक अतिरिक्त आय का स्त्रोत बना सकते है उन्ही व्यवसायों मे से एक है मुर्गी पालन जो की लगातार लोगों के बीच लोकप्रिये व्यवसाय के रूप मे विकशित हो रहा है। इस व्यवसाय का लोकप्रिये होने का मुख्य कारण कम लागत मे अच्छा मुनाफा का होना है। और यह व्यवसाय खेती-किसानी के साथ-साथ लोगों को रोजगार भी दे रहा है। आज मुर्गी पालन के व्यवसाय से बहुत सारे लोग जुङे है जिनमे की सिर्फ किसान ही नहीं बल्कि उधमी भी इस व्यवसाय को बङे पैमाने पर शुरू किए है।

मुर्गी पालन का उदेश्य

मुर्गी पालन का कार्य मुख्य रूप से अंडा उत्पादन, मांस उत्पादन, चूजे उत्पादन आदि के उदेश्य से किया जाता है। मुर्गी पालक इनमे से किसी एक उदेश्य के लिए मुर्गी पालन करते है कुछ ऐसे भी मुर्गी पालक होते है जो की बङे पैमाने पर मुर्गी का व्यवसाय करते है वो अंडा उत्पादन, मांस उत्पादन, चूजे उत्पादन तीनों के लिए मुर्गी पालन करते है। 

अंडा उत्पादन

अंडा उत्पादन के उदेश्य से मुर्गी पालन करने वाले मुर्गी पालक ऐसी ही नस्लों का चुनाव करते है जो की मुर्गी का नस्ल प्रति वर्ष ज्यादा अंडे देती है। मुर्गी के अंडे उत्पादन के लिए मुर्गी की निकोबारी और उत्तरा नस्ल के मुर्गियाँ अंडे उत्पादन के दृष्टि से इसका पालन किया जाता है ये नस्ल की मुर्गियाँ साल भर मे करीब 160 अंडे तक देती है। वैसे अंडे उत्पादन के लिए सबसे अच्छे नस्ल की सफेद मुर्गी होती है जिसे “व्हाइट लेग हार्न” कहते हैं। अंडे की मांग को देखते हुए अंडा उत्पादन के लिए वर्तमान समय मे मुर्गी पालन भी काफी मात्रा मे की जा रही है। 

उन्नत नस्ल की मुर्गियाँ साल भर में लगभग 200-250 अंडे देती हैं जबकि देशी मुर्गियाँ केवल 50-60 अंडे। इन मुर्गियों को साल भर अंडा देने के बाद बेच देना चाहिए क्योकि इनकी अंडा देने की क्षमता घट जाती है। और इसके आहार का खर्च पहले के जितना ही रहता है। जिसके कारण इसको बेचना ही सही माना जाता है।

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मांस उत्पादन

मांस उत्पादन के उदेश्य से मुर्गी पालन करने वाले मुर्गी पालक ऐसी ही नस्लों का चुनाव करते है जो की मुर्गी का नस्ल जल्दी से तैयार हो जाता है और कम समय मे मुर्गी का वजन लाभ देने के लिए तैयार हो जाता है। मांस उत्पादन के लिए कोरनिस, न्यूहेपशायर, असील, चटगाँव आदि नस्लें अच्छी मानी जाती है।

चूजे उत्पादन

चूजे उत्पादन के दृष्टि से मुर्गी पालन काफी फायदेमंद व्यवसाय है क्योंकि चूजों का मांग मांस उत्पादन के साथ-साथ अंडे उत्पादन के लिए भी काफी मात्रा इसकी मांग होती है। मुर्गी पालन मे चूजे उत्पादन का व्यपार काफी लाभदायक माना जाता है। 

मुर्गी पालन
मुर्गी पालन

मुर्गी पालन के लिए आवश्यक

मुर्गी पालन के लिए कुछ आवश्यक वस्तुओ की आवश्यकता होती है जिसे कि मुर्गियों के रखने के लिए घर, मुर्गियों को दाना पानी देने के लिए बर्तन, उन्नत नस्ल के मुर्गियों के बच्चे का चुनाव, ब्रूडर, रोगों से बचाव के लिए दवा की जरूरत, मुर्गी घर मे रोशनी का प्रबंध करना, मुर्गियों को अंडा देने के लिए बक्सा आदि का इंतजाम करना।

मुर्गी घर का निर्माण

मुर्गी घर बनाते समय मुर्गी पालकों को कुछ बातों को ध्यान मे रखना चाहिए की मुर्गी का घर उच्चे स्थान पर बनाए। इसकी दीवार मजबूत एवं मुर्गी घर मे हवा जाने एवं निकने की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए ताकि अधिक धुप, ठंढक तथा वर्षा से मुर्गियों का बचाव हो सके।

मुर्गी घर का निर्माण करते समय खासकर ऐसी जगह का चयन करना चाहिए जो शहर से दूर हो।  इससे चूजों पर प्रदूषण और गाड़ियों के हॉर्न या शोर से कोई खतरा नहीं होगा। मुर्गी घर अगर आप गाँव मे बनाने की सोच रहे तो इसे गाँव के कुछ दूर पर ही बनाना सही होता है। मुर्गियों को पानी पिलाने के लिए मुर्गी घर के पास ही पानी की अच्छी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे की मुर्गी पालकों को पानी की किल्लत न हो। मुर्गी घर मे रोशनी की भी व्यवस्था अच्छी करनी चाहिए। 

आहार

मुर्गियों की अच्छी बढ़ोतरी के लिए मुर्गियों का संतुलित आहार का होना बहुत ही आवश्यक होता है  क्योंकि मुर्गीयों का वृद्धि विकाश इसकी आहार पर ही निर्भर करता है। मुर्गियों की स्वस्थ्य अच्छा रहे तथा इसकी वृद्धि विकाश बनी रहे इसके लिए मुर्गियों को पानी, शर्करा, चिकनाई, प्रोटीन, खनिज पदार्थ तथा विटामिन आदि की आवश्यकता होती है।

मुर्गियों की आहार बनाने वाली कई कंपनियां बाजार मे उपलब्द है जो की मुर्गियों के लिए संतुलित आहार बनाती है इसे भी मुर्गी पालक अपनी मुर्गियों को खिला सकते है या तो मुर्गी पालक मुर्गियों का आहार घर पर भी बना सकते है मगर घर पर मुर्गियों का आहार तैयार करने मे कई प्रकार की कठनाइयाँ आने के कारण मुर्गी पालक इसे बाजार मे उपलब्ध मुर्गियों का आहार का ही ज्यादा प्रयोग करते है।

मुर्गियों मे होने वाली बीमारियाँ एवं उनके बचाव

मुर्गियाँ मे भी कई तरह की बीमरियाँ होती है जिसका सही समय पर इलाज न मिलने के कारण इससे मुर्गी पालकों को काफी नुकसान का सामना करना पङ सकता है। जरा सा ध्यान न देने पर मुर्गियों मे कई तरह के रोग हो जाते है कुछ रोग तो ऐसे होते है जो की मुर्गियों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। मुर्गियों मे रोग कई कारणों से आते है मुर्गी पालकों को बीमारी का मुख्य कारण का पता करके इसके नियंत्रण का तुरंत उपाय निकालना चाहिए। 

आमतौर पर मुर्गियों में रानीखेत या टूनकी, गम्बरों, ओमफ्लाइटिस(नाभि मे सूजन), सालमोनेला, ब्रूडर निमोनिया, अफ्लाटॅाक्सीन, काक्सीडिओसिसः आदि सम्बन्धी रोग होते हैं। इन बीमारियों का लक्षण जैसे ही दिखे इसके इलाज के लिए अपने निकट के मवेशी अस्पताल के पशुचिकित्सक से सलाह लेकर ही इलाज करावें। कभी- कभी अज्ञानतावश लापरवाही से सभी मुर्गियाँ मर सकती हैं इसलिए समय रहते ही इसका इलाज कराए।

मुर्गियों से उत्पादित अंडों, मांस, चूजों का व्यापार

किसी भी व्यवसाय मे लाभ के लिए व्यापार की व्यवस्था सही ढंग से होना बहुत ही आवश्यक माना जाता है। मुर्गी पालन से उत्पादित अंडो, मांस एवं चूजों की खपत करने के लिए मुर्गी पालकों को इसके उत्पादन से पहले ही इसके बाजार की व्यवस्था कर लेनी चाहिए। आपको पहले से ही ये पता कर लेना चाहिए की मुर्गियों के अंडे को कहाँ बेचना है एवं मुर्गियों को कहा बेचना है तथा मुर्गियों के चूजों की भी बेचने की व्यवस्था पहले से ही कर लेना चाहिए।

आप मुर्गी के अंडे और मुर्गी को अपने आस पास के दुकानों मे पता करके वहाँ पर आप इसे बेच सकते है जो दुकानदार इन सामानों को बेचता है उन्हे आप अपने सर्विस के बारे में बताये। यदि उन्हे आपका प्रोडक्ट का कीमत और गुणवत्ता पसंद आता है तब वो आपके साथ व्यवसाय करने को तैयार हो जाएगा। आप अपने प्रोडक्ट को परिवहन की मदत से एक जगह से दूसरी जगह अपने प्रोडक्ट को ले जा सकते हो। इस तरह से आपको इसमे कुछ ज्यादा मुनाफा भी देखने को मिल सकता है। 

murgi palan kaise kare
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मुर्गी पालन मे प्रयोग मे आने वाले यंत्र

मुर्गी पालन मे चूजों और मुर्गियों के लिए दाना और पानी उपलब्ध कराने के लिए (फीडर) एवं पानी की बर्तनों की आवश्यकता होती है। आजकल बाजार मे अनेक प्रकार के दाने और पानी को देने के लिए अनेक प्रकार के यंत्र आ गए है। जिसकी मदद से मुर्गियों को दाना और पानी देने मे मुर्गी पालकों को काफी आसानी हुई है। लेकिन यंत्रों को खरीदने से पहले मुर्गी पालकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की हम उस यंत्र का चुनाव करें जिसमे की दाना और पानी की बर्बादी न हो पाए।

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मुर्गी पालन के प्रकार (types of poultry farming)

ज्यादातर मुर्गी पालक दो ही प्रकार के मुर्गी पालन करते है। 

  1. ब्रायलर मुर्गी पालन (broiler poultry farming)
  2. लेयर मुर्गी पालन (layer poultry farming)

ब्रायलर मुर्गी पालन क्या है (Broiler poultry farming Kya hai)

ब्रायलर मुर्गी पालन मांस के लिए किया जाता है अगर आप मांस उत्पादन के दृष्टि से इस व्यवसाय को करना चाहते है तो इसके लिए आपको ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहिए। ब्रायलर मुर्गी पालन हाल के दिनों मे मुर्गी पालन व्यवसाय मे इसकी मांग ज्यादा देखने को मिली है। बकरी या भेङ की मांस की तुलना मे मुर्गी की मांस की मांग काफी ज्यादा है। मुर्गी के मांस का ज्यादा मांग होने का कारण ये भी हो सकता है की इसकी कीमत बकरी और भेङ की मांस की तुलना मे कम होता है।

ब्रायलर मुर्गी पालन करने वाले मुर्गी पालक ऐसे ही नस्लो का चयन करते है जो कम समय मे तैयार हो जाता है। ब्रायलर मुर्गी पालन कम लागत मे एक अच्छा व्यवसाय के रूप उभरा है इस व्यवसाय से कम समय मे अच्छे खासे मुनाफे कमाए जा सकते है।

लेयर मुर्गी पालन क्या है (Layer poultry farming kya hai)

लेयर मुर्गी पालन अंडे के उत्पादन के लिए किया जाता है अगर आप मुर्गी पालन अंडे की उत्पादन के लिए करना चाहते है तो लेयर मुर्गी पालन आपके व्यवसाय के लिए अच्छा साबित हो सकता है। लेयर मुर्गी पालन करने वाले मुर्गी पालक ऐसे ही मुर्गी के नस्ल का चुनाव करते है जो मुर्गी का नस्ल अंडे ज्यादा देती है कुछ मुर्गी के ऐसे भी नस्ल है जो की एक साल मे 250 से 300 तक अंडे देते है। ऐसी मुर्गी के नस्ल लेयर मुर्गी पालन के लिए अच्छा होता है।

मुर्गी की अंडे की मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है जो की लेयर मुर्गी पालन करने वाले लोगों के व्यवसाय के लिए फायदेमंद हो सकता है। लेयर मुर्गी पालन करने वाले मुर्गी पालक अंडे के आलवा मुर्गी को मांस के लिए भी उपयोग में लाया जा सकता है।

मुर्गी पालन से लाभ (Murgi palan se labh)
  1. बहुत कम लागत से इस व्यवसाय को शुरू किया जा सकता है क्योंकि इस व्यवसाय को शुरू करने मे न ज्यादा अधिक भूमि की जरूरत होती है और नाही ज्यादा श्रमिक की। इस व्यवसाय को आम आदमी भी अपना सकता है। 
  2. खेती-किसानी के साथ-साथ अतिरिक्त आय का एक अच्छा स्त्रोत है ये व्यवसाय। इससे अतिरिक्त आय के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों के लिए इस व्यवसाय से पौष्टिक आहार भी मिलता है क्योंकि मुर्गी के अंडे एवं मांस मे उच्च गुणों वाले प्रोटीन एवं विटामिन पाए जाते है जो की बच्चों की शरीरिक वृद्धि तथा मानसिक विकाश मे भी सहायता करती है। 
  3. मुर्गियों से प्राप्त खाद मे नाईट्रेट/यूरिया की मात्रा पाई जाती है। इस खाद को फसलों मे डालकर फसलों की पैदावार को बढ़ाया जा सकता है। 
  4. इससे प्राप्त उत्पाद को बेचने के लिए किसी खास बाजार की आवश्यकता नहीं होती है इसे अपने आस-पास के बाजार मे भी आसानी से विक्रय किया जा सकता है। क्योंकि अंडे एवं मुर्गियों की मांस की मांग हर क्षेत्र मे है। 
  5. किसी आवश्यक जरूरत पङने पर मुर्गियों को बेचकर आसानी से नगद पैसा प्राप्त किया जा सकता है। मुर्गियों को बेचने के लिए स्थानीये स्तर पर बाजार उपलब्ध होते है।

बेकयार्ड मुर्गी पालन क्या है (Backyard Poultry Farming kya hai)

बेकयार्ड मुर्गी पालन यानि की घर के पिछवारे मे मुर्गी पालन करना। वर्तमान समय मे देशी एवं बेहतर कम लागत वाली मुर्गियों के नस्लों को आसानी से बेकयार्ड मे पाला जा सकता है। बेकयार्ड मुर्गी पालन ग्रामीण समुदाय को अजीविका प्रोटीन युक्त खाद्य एवं स्वरोजगार प्रदान करने मे काफी मदद कर रहा है।

घर के पिछवारे मे 10 से 20 देशी एवं कम लागत वाली मुर्गियों की प्रजाति को रसोई घर के वेस्ट से पाला जा सकता है। घर एवं उसके आस पास अनाज के गिरे दाने, टूटे हुए आनज, सब्जियों का बचा हुआ भाग, झाङ-फूसो के बीच के कीङे-मकौङे, घास की कोमल पत्तीयां तथा घर के जूठन आदि खाकर अपना पेट भरती है। बेकयार्ड मुर्गी पालन से प्राप्त अंडों एवं मांस की कीमत भी अच्छी मिलती है। बेकयार्ड मुर्गी पालन मे वनराजा, ग्रामप्रिया, निर्भीक, हितकेरी, गिरिराजा, कृष्णा आदि मुर्गियों के नस्ल बेकयार्ड मुर्गी पालन के लिए अच्छा माना जाता है।

Poultry Farming
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मुर्गी पालन मे ध्यान रखने योग्य बातें

मुर्गी पालन मे कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद ही जरूरी होता है इसमे एक छोटा सा लापरवाही आपको नुकसान करा सकता है। इसलिए अगर आप मुर्गी पालन करने की सोच रहे है तब आप निम्नलिखित बातों का ध्यान रखे। 

  • अगर आप पहली बार मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू करने जा रहे है तो आप मुर्गी पालन पहले छोटे स्तर पर करें। छोटे स्तर से शुरू करके मुर्गी पालन का अनुभव ले ले। फिर इसके बाद आप इस व्यवसाय को बङे पैमाने पर कर सकते है।
  • इस काम को शुरू करने से पहले ही इसमे उपयोग मे आने वाले उपकरण, मुर्गियों के रखने के लिए घर, मुर्गियों को दाना पानी देने के लिए बर्तन, उन्नत नस्ल के मुर्गियों के बच्चे का चुनाव, ब्रूडर, रोगों से बचाव के लिए दवा की जरूरत, मुर्गी घर मे रोशनी का प्रबंध करना आदि की व्यवस्था पहले ही कर लेना अच्छा होता है। 
  • समय-समय पर मुर्गी के घर को साफ-सफाई करते रहना चाहिए जिससे की मुर्गियों के बीच किसी भी प्रकार का बीमारी न हो पाए। मुर्गियों मे जैसे ही किसी बीमारी का लक्षण दिखे तो तुरंत इसके इलाज का व्यवस्था करनी चाहिए।
  • आप इस बात का ध्यान रखे की बरसात के दिनों मे मुर्गी घर मे नमी न हो पाए।
  •  समय-समय पर मुर्गी घर की सफाई कर लकङी के बुरादों को बदलते रहना चाहिए।
  • मुर्गियों को समय-समय पर टीका देते रहना चाहिए जिससे की मुर्गियों मे किसी भी प्रकार का बीमारी ना आ पाए।
  • भोजन और पानी की अच्छी व्यवस्था रखे।

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कम लागत मे कैसे शुरू करे मुर्गी पालन

अगर आप मुर्गी पालन करना चाहते है और आप इसमे ज्यादा पूँजी नहीं लगाना चाहते है तो इसके लिए आपको मुर्गी पालन का व्यवसाय पहले छोटे स्तर से शुरू करना चाहिए। आप इस व्यवसाय को 10 से 20 मुर्गियों के पालन करने से भी शुरू कर सकते है। इसमे कोई ज्यादा खर्च भी नहीं आएगा। और इससे आपको अंडे के साथ-साथ मांस की भी प्राप्ति होगी। अगर बात करें मुर्गियों की वार्षिक अंडा उत्पादन की तो कुछ मुर्गियों की किस्म ऐसी भी होती है जो की साल भर मे 200 से 250 अंडे तक देती है और उसके बाद मांस का भी उत्पादन देती है।

आप अगर छोटे स्तर पर मुर्गी पालन शुरू कर रहे है तो आप ऐसे मुर्गियों के नस्लों का चुनाव करे जो मांस एवं अंडों दोनों के लिए उपयुक्त हो। कुछ मुर्गियों का नस्ल ऐसे भी होते है जो की सिर्फ मांस उत्पादन के लिए पाला जाता है और कुछ ऐसे नस्ल होते है जो की सिर्फ अंडे उत्पादन के लिए पाला जाता है। 

Important: अगर आप मुर्गी पालन शुरू करना चाहते है तो आपको सबसे पहले मुर्गी पालन का प्रशिक्षण करना चाहिए। अगर आप मुर्गी पालन मे प्रशिक्षण लेना चाहते है तो मुर्गी पालन के प्रशिक्षण मे आपकी राज्य के कृषि विश्वविद्यालय या आपके जिले के कृषि विज्ञान केंद्र आपकी मदद कर सकता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q. मुर्गी पालन को अंग्रेजी में क्या कहते हैं ?
मुर्गी पालन को अंग्रेजी मे Poultry Farming कहा जाता है एवं इसे मुर्गी पालन के आलवा इसे कुक्कुट पालन के नाम से भी जाना जाता है।
Q. मुर्गी पालन को हिंदी में क्या कहते हैं ?
मुर्गी पालन को हिन्दी मे कुक्कुट पालन के नाम से भी जाना जाता है। कुक्कुट शव्द पालतू कुक्कुट आदि का सूचक है। जिसे मांस, अंडा एवं पंख उत्पादन के लिए पाला जाता है इसमे मुर्गी, बत्तख, राजहंस, कबूतर आदि पक्षियों को पाला जाता है।  
Q. मुर्गियों में होने वाले रोग कौन कौन से हैं ?
आमतौर पर मुर्गियों में रानीखेत या टूनकी, गम्बरों, ओमफ्लाइटिस(नाभि मे सूजन), सालमोनेला, ब्रूडर निमोनिया, अफ्लाटॅाक्सीन, काक्सीडिओसिसः आदि सम्बन्धी रोग होते हैं।
Q. मुर्गी एक साल में कितने अंडे देती है ?
मुर्गियाँ एक साल मे 200 से 250 अंडे तक देती है ये निर्भर करता है मुर्गियों के नस्लों पर कोई मुर्गी के नस्ल पूरे साल मे सिर्फ 60 से 80 अंडे ही दे पाती है। 
Q. ब्रायलर मुर्गी पालन और लेयर मुर्गी पालन मे क्या अंतर है ?
ब्रायलर मुर्गी पालन और लेयर मुर्गी पालन मे अंतर ये है कि ब्रायलर मुर्गी पालन मांस के लिए किया जाता है और लेयर मुर्गी पालन अंडे के लिए किया जाता है।

तो दोस्तों मुझे आशा है कि आपको मुर्गी पालन (Poultry Farming) से जुड़ी जानकारी पसंद आयी होगी इस पोस्ट मे मुर्गी पालन क्या है, मुर्गी के नस्ल, मुर्गी पालन कैसे करें, मुर्गी पालन का उदेश्य, मुर्गी पालन के लिए आवश्यक, मुर्गी घर का निर्माण, मुर्गियों मे होने वाली बीमारियाँ एवं उनके बचाव, मुर्गियों से उत्पादित अंडों, मांस, चूजों का व्यापार, मुर्गी पालन मे प्रयोग मे आने वाले यंत्र, मुर्गी पालन के प्रकार, ब्रायलर मुर्गी पालन क्या है, लेयर मुर्गी पालन क्या है, मुर्गी पालन से लाभ, बेकयार्ड मुर्गी पालन क्या है, मुर्गी पालन मे ध्यान रखने योग्य बातें, मुर्गी पालन मे ध्यान रखने योग्य बातें, कम लागत मे कैसे शुरू करे मुर्गी पालन से जुङे जानकारी दि गई है। अगर आपको इस पोस्ट से संबंधित कोई भीं सवाल हो तो आप हमसे कमेंट सेक्शन में पूछ सकते है।

तो दोस्तों मुझे आशा है कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा, अगर आपको पसंद आया है तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे। और उन तक भी मुर्गी पालन के बारे मे जानकारी पहुँचाए।

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धन्यबाद

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