Wednesday, August 17, 2022

Sprinkler irrigation : स्प्रिंकलर सिंचाई से सिंचाई करने पर होती हैं पानी की बचत, जानिए इसकी विशेषता एवं लाभ

कृषि के कार्यों मे सिंचाई का काफी महत्व है अच्छी फसल उत्पादन के लिए समय-समय पर फसलों को सिंचाई की आवश्यकता होती है। फसलों की सिचाई करने की कई सिचाई प्रणाली है। इन्ही सिंचाई प्रणालियों मे से एक है स्प्रिंकलर सिंचाई (Sprinkler irrigation) प्रणाली। जिसे बौछारी सिंचाई के नाम से भी जानते हैं। फसलों एवं बाग-बगीचों मे सतही सिंचाई विधि से सिंचाई करने पर पानी का 50-60 प्रतिशत भाग किसी न किसी कारण से बर्बाद हो जाता है। यदि फसल की सिंचाई स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली से कि जाए तो पानी की बचत की जा सकती है।

जब किसान फ्लड इरिगेशन (flood irrigation) प्रणाली से फसलों की सिंचाई करते है तो पौधों को जरूरत से ज्यादा पानी मिल जाता है जिससे पानी की बर्बादी होती है। स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली मे पौधों को जितना पानी की आवश्यकता होती है उतना ही पानी पौधों को दिया जाता हैं जिससे कि पानी की बचत होती है।

क्या हैं स्प्रिंकलर सिंचाई (Sprinkler irrigation kya hain)

स्प्रिंकलर सिंचाई मे पानी को महीन-महीन बूँदों मे बदलकर फसलों पर वर्षा के बूँदों के समान गिराया जाता हैं जिससे फसलों की सिंचाई होती हैं। स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली से सिंचाई करने पर पानी पौधों पर वर्षा के बूंदे की तरह पङती हैं।

Sprinkler irrigation
Sprinkler irrigation

स्प्रिंकलर के बारें मे

स्प्रिंकलर भी कई प्रकार के आते है जैसे कि मिनी स्प्रिंकलर, माइक्रो स्प्रिंकलर, पोर्टेबल स्प्रिंकलर आदि इन अलग-अलग स्प्रिंकलर को अलग-अलग फसल की सिंचाई मे इस्तेमाल किया जाता हैं। 

मिनी स्प्रिंकलर (mini sprinklers)  चाय, आलू, प्याज, धान, गेहूं, सब्जी आदि 
माईक्रो स्प्रिंकलर (micro sprinkler) लीची, पॉली हाउस, शेडनेट हाउस आदि
पोर्टेबल स्प्रिंकलर (portable sprinklers) दलहन, तेलहन, धान, गेहूं आदि

कैसे करता हैं काम

स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति का मुख्य अवयव पपिंग स्टेशन या हेडर असेंबली, बाई पास वाल्व, फर्टिलाईजर टैंक, फिल्ट्रैशन सिस्टम, प्रेशर गेज, कंट्रोल वाल्व, एच.डी.पी.ई/पी.वी.सी पाइप, स्प्रिंकलर नोजेल आदि हैं। स्प्रिंकलर से सिंचाई करने के लिए स्प्रिंकलर को फसलों के अनुसार उचित दूरी पर लगाने के बाद पंप चलाया जाता हैं जिससे पानी तेज बहाव के साथ पाइप मे आता हैं और स्प्रिंकलर मे लगी नोजेल पानी को वर्षा की फुहार की तरह फसलों पर गिराती हैं। जिससे फसलों की सिंचाई होती हैं।

यह भी पढे.. 90 प्रतिशत सब्सिडी पर किसानों को मिल रही हैं ड्रिप सिंचाई उपकरण, ऐसे उठायें लाभ

स्प्रिंकलर सिंचाई से लाभ (Sprinkler irrigation se labh)

  • जब पानी वर्षा की बूँदों की तरह पौधों पर गिरती है तो भूमि पर जल का जमाव नहीं होता है और कम पानी मे फसल की सिंचाई हो जाता हैं।
  • जिस खेत की भूमि ऊँची-नीची होती है वहाँ पर सतही सिंचाई करना मुश्किल हो जाता है ऊँची जगहों पर पानी चढ़ाने के चक्कर मे निचली भूमि मे ज्यादा पानी लग जाता है जिससे फसल नुकसान होने के साथ-साथ पानी की भी बर्बादी होती हैं।
  • सिंचाई मे स्प्रिंकलर के इस्तेमाल करने से पानी के साथ-साथ उर्वरक, कीटनाशक एवं खरपतवारनाशक आदि दवाइयों का छिङकाव भी आसानी से इसकी मदद से की जा सकती हैं।
  • सतही सिंचाई के तुलना मे इस सिंचाई पद्धति से सिंचाई करने पर कम पानी मे ज्यादा क्षेत्र की सिंचाई की जा सकती हैं।
  • इस सिंचाई पद्धति के मदद से फसल को आवश्यकता के अनुसार हर दिन या एक दो दिन छोड़कर पानी आसानी से दिया जा सकता हैं।
  • इस सिंचाई पद्धति का इस्तेमाल करने से पानी का ही नहीं बल्कि मजदूरी, समय और पैसे आदि की भी बचत होती हैं।
  • स्प्रिंकलर सिंचाई मे दूसरी सिंचाई के तरीको के तुलना में मानव श्रम का कम उपयोग होता है।
  • स्प्रिंकलर सिंचाई से सिंचाई करने पर खेतो मे मेढ एवं नालियाँ बनाने की आवश्यकता नहीं होती है जिससे किसानों को श्रम के साथ-साथ पैसे की भी बचत होती है। 
स्प्रिंकलर सिंचाई हेतु उपयुक्त फसलें

स्प्रिंकलर सिंचाई का उपयोग आलू, प्याज, चाय, धान, गेहूं, सब्जी, दलहन, तिलहन आदि की फसलों की सिंचाई करने मे किया जाता हैं। जब किसान फसलों की सिंचाई करने के लिए सतही सिंचाई पद्धति का उपयोग करते हैं तो उसमे फसलों को आवश्यकता से ज्यादा पानी मिल जाता है जिससे फसल के खराब होने की संभवना होती हैं। तथा जब किसान स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति से फसलों की सिंचाई करते है तो फसल को आवश्यकता के अनुसार पानी दिया जाता हैं जिससे पानी की भी बर्बादी नहीं होती हैं और खेत की मिट्टी मे नमी का उपयुक्त स्तर बना रहता हैं जिसके कारण फसल की वृद्धि, उपज और गुणवत्ता अच्छी होती हैं।

Agriculture in hindi

स्प्रिंकलर सिंचाई की देखभाल

अगर आप चाहते है कि आपकी स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम लंबे समय तक बिना किसी रुकावट के कार्य करें तो नियमित रूप से इसकी देखभाल करें एवं निम्नलिखित कुछ बातों को ध्यान मे रखे। 

  1. स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम की फिल्ट्रैशन सिस्टम, स्प्रिंकलर नोजेल, वाल्व एवं विभिन्न फिटिंग्स की जांच समय-समय पर करते रहना चाहिए।
  2. कभी भी पाइपों पर ट्रैक्टर या किसी भी गाङी को नहीं चढ़ना चाहिए, गाङीयों के चढ़ने से पाइपों को नुकसान पहुँच सकता है। 
  3. प्रत्येक सप्ताह या कुछ दिनों के अंतराल पर फिल्टर का ढक्कन खोलकर ये देख लेना चाहिए कि फिल्टर मे किसी भी प्रकार का रेट या कुङा-कचरा तो नहीं फसा हुआ है अगर कोई रेट या कुङा-कचरा फसा है तो उसे हाथों की मदद से बाहर निकाल ले। 
  4. पाइपो को खेत से हटाते समय इस बात का ध्यान रखे की पाइप को किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुंचे।
  5. उर्वरकों, कीटनाशक/ खरपतवारनाशी आदि दवाओं के छिङकाव के बाद प्रणाली को अच्छी तरह से स्वच्छ पानी से सफाई कर लेना चाहिए।

होगी श्रम की बचत

दूसरी सिंचाई के तरीको के तुलना में इस सिंचाई पद्धति मे मानव श्रम कम लगता हैं क्योंकि एक बार खेत मे स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति लगा देने के बाद सिंचाई करने मे और कोई मेहनत नहीं लगता हैं इससे सिंचाई करने पर न तो सिंचाई करने के लिए मेढ एवं नालियाँ बनाने की आवश्यकता होती है और नाही खेत को समतल करने की आवश्यकता होती हैं क्योंकि इससे ऊँची-नीची जमीन की भी अच्छे तरीके से सिंचाई की जा सकती हैं।

Intercropping in sugarcane field

इस सिंचाई पद्धति से फसलों मे उर्वरकों, कीटनाशक/ खरपतवारनाशी आदि दवाओं का छिङकाव करने मे भी आसानी होती हैं यह बलुई मिट्टी एवं अधिक ढाल वाली तथा ऊंची-नीची जगहों के लिए उपयुक्त सिंचाई विधि है।

स्प्रिंकलर सिंचाई से हानियाँ

  1. इस सिंचाई पद्धति से तेज हवा मे सिंचाई करने पर पानी का वितरण समान रूप से नहीं हो पाटा हैं इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि तेज हवा मे इससे सिंचाई न करें इससे सिंचाई करने के लिए हवा की गति 15 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं होनी चाहियें।
  2. फसलों को रोगों एवं खरपटवारों से बचाने के लिए कीटनाशक/ खरपतवारनाशी आदि दवाओं का छिङकाव इससे करने पर दवाओ की घुलकर बह जाने का डर रहता हैं। 

स्प्रिंकलर सिंचाई पर सब्सिडी (Sprinkler irrigation Subsidy)

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत स्प्रिंकलर सिंचाई पर किसानों को सब्सिडी प्रदान की जाती है अलग-अलग राज्यों में समय-समय पर स्प्रिंकलर सिंचाई पर सरकार सब्सिडी देती है. सब्सिडी की दर राज्य सरकारों की अलग-अलग होती है। सामान्यतः इसपर 40 से 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाती है कई राज्य इसपर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी देती हैं। किसान सब्सिडी की और अधिक जानकारी के लिए कृषि विभाग के आधिकारियों से भी संपर्क कर सकते है या कृषि विभाग की पोर्टल पर सब्सिडी की जानकारी चेक कर सकते हैं।

योजना आधिकारिक वेबसाइट
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना https://www.pmksy.gov.in/

farming in hindi

स्प्रिंकलर सिंचाई से संबंधित पूछे गए प्रश्न (FAQs)

Q. स्प्रिंकलर सिस्टम क्या है?
स्प्रिंकलर सिस्टम सिंचाई करने की पद्धति है जिससे फसलों की सिंचाई की जाती हैं।
Q. ड्रिप और स्प्रिंकलर क्या है?
ड्रिप और स्प्रिंकलर फसलों की सिंचाई करने की पद्धति हैं जिससे फसलों की सिंचाई की जाती हैं।
Q. स्प्रिंकलर कितने प्रकार का होता है?
स्प्रिंकलर तीन प्रकार के होते हैं मिनी स्प्रिंकलर, माइक्रो स्प्रिंकलर, पोर्टेबल स्प्रिंकलर। इन अलग-अलग स्प्रिंकलर को अलग-अलग फसल की सिंचाई करने मे इस्तेमाल किया जाता हैं। 

तो मुझे आशा है कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा, अगर आपको पसंद आया है तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे। और उन तक भी स्प्रिंकलर सिंचाई के बारे मे जानकारी पहुँचाए।

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धन्यबाद.. 

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