Wednesday, August 17, 2022

लेमनग्रास की खेती कर किसान कमा सकते हैं अधिक मुनाफा- LemonGrass

लेमनग्रास (LemonGrass) का नाम आपने कभी न कभी किसी से सुना ही होगा। इसकी औषधिए गुणों की तारीफ करते हुए आपको कई लोग मिले होंगे। लेमनग्रास को हमारे देश मे कई नामों से जाना जाता है इसे नींबू घास, मालाबार घास एवं कोचीन घास आदि नामों से भी जाना जाता है। लेमनग्रास इन हाल ही के दिनों हमारे देश मे काफी लोकप्रिये हुआ है। आजकल लेमनग्रास का सेवन काफी चलन मे है इसके अनेकों औषधिए गुणों के चलते लोग इस ग्रास को अपने घरों मे इसका पौधा भी लगाना शुरू कर दिये है लोग इसके पौधों को छत पर गमले मे या तो फिर अपने घर के गार्डन मे लगा रहे है।

हमारे देश मे अधिकतर किसान वही सालों से चली आ रही फसलों और पुरानी तकनीक के सहारे खेती करते आ रहे हैं. ऐसे में किसानों को कोई खास मुनाफा भी नहीं होता है। अभी के दिनों मे किसान अब नए किस्म के फसलों की खेती की तरफ रुख कर रहे हैं कुछ किसान ऐसे भी है जो बङी मात्रा मे लेमनग्रास की व्यवसायिक खेती कर इससे अच्छे मुनाफे कमा रहे है लेमनग्रास की पतियों को आसवित करके इससे तेल निकाल जाता है इसके तेल मे 80 से 90 प्रतिशत तक सिट्रल पाया जाता है। लेमनग्रास की तेल की बाजार भाव अच्छी होने के कारण इससे किसान अच्छे मुनाफे कमा रहे है।


लेमनग्रास क्या है (LemonGrass kya hai)

लेमनग्रास खुशबूदार एवं औषधिए गुणों से भरा एक घास की तरह दिखने वाला पौधा है जो की देखने मे झारीयों की तरह ही लगता है लेकिन इसकी खुशबू एवं औषधिए गुणों के कारण इसे अन्य घास एवं झारीयों से इसे अलग बनाती है। इस घास को हमारे देश मे कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है जिसमे नींबू घास नाम काफी प्रचलित है इसकी पत्तीयों की नीबू जैसी सुगंध के कारण इस घास का नाम नींबू घास पङा है।

LemonGrass kya hai
LemonGrass kya hai

लेमनग्रास की खेती के बारे मे जानकारी

कैसे करें लेमनग्रास की खेती (LemonGrass ki kheti kaise karen)

लेमनग्रास की खेती के लिए ऊष्ण तथा समशीतोष्ण जलवायु काफी उपयुक्त माना जाता है इसकी खेती ऐसी क्षेत्र मे करना ज्यादा अच्छा माना जाता है जिस क्षेत्र की जलवायु गर्म तथा आर्द्र हो। लेमनग्रास की खेती सभी प्रकार की मिट्टी मे कर सकते है. इसकी खेती के लिए दोमट उपजाऊ मिट्टी अच्छी मानी जाती है। इसकी खेती उन क्षेत्रों मे आसानी से कर सकते है जहाँ कम वर्षा होती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों मे इसकी सिचाई के लिए सिचाई साधनों की आवश्यकता होती है जिससे की जरूरत पङने पर लेमनग्रास की सिचाई की जा सके।

लेमनग्रास की खेती बीज एवं लेमनग्रास की कलमों (स्लिप) से की जाती है अगर आप लेमनग्रास की खेती बीज से करते है तब आपको इसके लिए लेमनग्रास की बीज से नर्सरी तैयार करना होता है। नर्सरी तैयार हो जाने के बाद नर्सरी से तैयार पौधों को उखाड़ कर खेत में या अन्य जगह रोपाई करते हैं। अगर आप लेमनग्रास की कलम से इसकी खेती करते है तब आपको कुछ बातों को ध्यान मे रखना होता है जैसे कि पौधा का कलम एक साल पुराना हो, और कलम पूरी तरह से स्वस्थ होनी चाहिए इसमे किसी भी प्रकार का रोग नहीं होना चाहिए। अगर आपको इसकी कलम मे किसी भी प्रकार का रोग दिखे तो उस कलम की रोपाई नहीं करना चाहिए।

लेमनग्रास के पौध तैयार करने मे करीब दो से तीन महीने का समय लगता है अगर कोई किसान लेमनग्रास के कलमों से इसकी रोपाई करता है तो किसान की समय की बचत होती है और लेमनग्रास के कलमों की ज्यादा कीमत भी नहीं होती है इसे किसान प्रति कलम करीब 1 से 2 रुपये मे खरीद सकते है। लेमनग्रास की अलग-अलग किस्म की कलमों की कीमत अलग-अलग होती है।

LemonGrass
LemonGrass

लेमनग्रास को प्रायः वर्षा ऋतु के प्रारंभ में लगाया जाता है जिससे की ज्यादा सिचाई की आवश्यकता नहीं होती है इसकी रोपाई फरवरी माह में भी किया जा सकता है बस किसानों को सिंचाई की अच्छी व्यवस्था करनी होती है जिससे की लेमनग्रास को फरवरी माह मे भी आसानी से रोपाई किया जा सके। आमतौर पर लेमनग्रास की एक बार रोपाई कर देने के बाद इससे पांच वर्ष तक फसल ली जा सकती है। जिसके कारण फसल की बुआई करने से पहले खेत की अच्छी जुताई करना बहुत ही आवश्यक माना जाता है। अगर खेत की जुताई करते समय किसानों को ये लगे की मिट्टी मे दीमंक का प्रकोप है तो इसके उपचार के लिए खेत की आखरी जुताई के समय 5 प्रतिशत बी.एच.सी पाउडर 25 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से खेत की मिट्टी में मिला देना काफी अच्छा माना जाता है। खेत की मिट्टी मे बी.एच.सी पाउडर मिला देने के बाद पाटा चलाकर खेत की मिट्टी को समतल कर लेना चाहिए।

सिचाई

लेमनग्रास की खेती मे ज्यादा सिचाई की आवश्यकता नहीं होती है इसकी खेती मे गर्मियों के समय मे ज्यादा सिचाई की आवश्यकता होती है लेमनग्रास की फसल एक बार लग जाने के बाद ज्यादा सिचाई की आवश्यकता नहीं होती है। इसकी सिचाई गर्मियों के दिनों मे 10 दिन के अंतराल पर तथा सर्दियों मे करीब 15 से 20 दिनों के अंतराल पर सिचाई करना फसल की अच्छी बढ़ोतरी के लिए अच्छा माना जाता है। 

खरपतवार नियंत्रण

लेमनग्रास की फसल मे केवल पहली बार एवं प्रत्येक कटाई के उपरांत निराई-गुराई करने की आवश्यकता होती है जिसे किसान अपनी हाथों के मदद से इस काम को आसानी से कर सकते है लेकिन इस काम को करने मे किसानों को काफी समय लगता है तथा ये काम भी काफी मसकक्त भरा है। किसान रसायनों की मदद से भी खरपतवार को नियंत्रित कर सकते है लेकिन रसायनों का प्रयोग खरपतवार नियंत्रण के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।

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फसल की कटाई

लेमनग्रास की खेती मे इसकी पहली कटाई बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है आमतौर पर इसकी पहली कटाई फसल के बुआई के 100 दिनों के बाद किया जाता है। फसल की कटाई करते समय किसानों को फसल को भूमि की सतह से 10 से 15 सेमी ऊपर जहाँ से लेमनग्रास के पत्ते शुरू होते है वहाँ से इसकी कटाई करनी चाहिए। 

फसल की पहली कटाई हो जाने के बाद फसल पुनः बढ़ने लगता है तथा फिर इससे 60 से 90 दिनों मे इसकी दूसरी बार कटाई किया जा सकता है। प्रत्येक 60 से 90 दिनों के अंतराल पर इसकी अगली कटाई की जा सकती है। लेमन ग्रास की बुआई के पहले वर्ष मे करीब 3 से 4 कटाई ले सकते है तथा उसके अगले साल इसकी फसल से 5 से 7 कटाई ले सकते है।

लेमनग्रास की पत्तियों से तेल निकालने की प्रक्रिया

लेमनग्रास की पत्तियों से तेल निकालने के लिए वाष्प आसवन या जल आसवन विधि का उपयोग किया जाता है। लेमनग्रास की फसल से पत्तियों की कटाई के बाद कुछ समय के लिए इसकी पत्तियों को मुरझाने के लिए छोङ दिया जाता है। इसके बाद इसकी पत्तियों को आसवन किया जाता है आसवन की क्रिया से तेल निकलने मे करीब 3 से 4 घंटे का समय लगता है। लेमनग्रास की पत्तियों से प्रति वर्ष 1 हेक्टेयर मे करीब 150-300 किलोग्राम तेल की प्राप्ति होती है।


लेमनग्रास की किस्म (LemonGrass ki Variety)

लेमनग्रास की खेती शुरू करने से पहले इसकी उन्नत किस्मों के बारे मे जानना काफी फायदेमंद होता है इसकी अनेक किस्मे अलग-अलग संस्थाओ द्वारा विकशित की गई है जो की नीचे दिया गया है।

  • प्रगति 
  • प्रमाण
  • कृष्णा 
  • कावेरी 
  • नीमा
  • चिरहरित
  • सी. के. पी. – 25 
  • आर. आर. एल -16

लेमनग्रास तेल की मार्केटिंग

लेमनग्रास की खेती करने वाले किसान शुरू-शुरू मे इसके तेल के बाजार को लेकर काफी परेशान रहते है क्योंकि किसान ऐसा सोचते है कि अगर हमारी तेल की बिक्री नहीं हुई तो इसे घर मे भी इस्तेमाल नहीं कर पायेगे। क्योंकि इसे अन्य फसलों की तरह जो की खाने योग्य होते है उनका इस्तेमाल किसान घर मे भी करते है। जिससे की किसानों को फसलों से प्राप्त उत्पाद को बेचने के लिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं होती है।

लेमनग्रास की खेती करने वाले किसानों को बाजार ढूंढने में शुरू-शुरू मे थोङा परेशानी का सामना करना पङता है लेकिन ढूंढने पर आसानी से मिल भी जाता है। लेमनग्रास की तेल को कॉस्मेटिक्स, साबुन, डिटर्जेंन, दवाओं आदि बनाने वाली कंपनियाँ भी इसकी खरीदारी करती है किसान इनसे संपर्क करके भी अपने प्रोडक्ट को बेच सकते है।

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लेमनग्रास की तेल की कीमत (Lemongrass Oil Price)

लेमनग्रास की बाजार भाव मे उतार-चढ़ाव आते रहता है लेमनग्रास की तेल की कीमत 800 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम या इससे कभी-कभी अधिक भी होता है कभी-कभी तो ऐसा भी देखा गया है कि इसके भाव मे काफी उछाल आता है। इसकी कीमत पूरी तरह से बाजार भाव पर निर्भर करता है।

Lemongrass Oil Price
Lemongrass Oil Price

लेमनग्रास किस काम मे आता है

लेमनग्रास की पत्तियों से सिट्रल नामक तेल की प्राप्ति होती है इससे प्राप्त तेल का उपयोग औषधि बनाने के अलावा इत्र एवं सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में भी किया जाता है। दवाई बनाने वाली कंपनियां इनकी तेल की खरीदी करती हैं। इत्र, सौंदर्य के सामान और साबुन बनाने में भी लेमनग्रास का उपयोग होता है जिससे की लेमनग्रास के तेल की मांग काफी ज्यादा है।


लेमनग्रास की खेती करने के फायदे

इसकी खेती करने के अनेकों फायदे है जैसे कि इसकी फसल को एक बार लगाने के बाद किसानों को 4 से 5 वर्षों तक इसकी फसल को लगाने की जरूरत नहीं होती है। इसकी खेती मे किसानों को ज्यादा लागत की भी आवश्यकता नहीं होती है इसकी खेती की शुरुआती वर्षों मे कुछ ज्यादा लागत की आवश्यकता होती है फिर 4 से 5 वर्षों तक बहुत कम लागत मे इससे अच्छे मुनाफे कमाए जा सकते है।

बाजार मे इसकी तेल की कीमत भी अच्छी मिलती है जिसका मुख्य कारण ये भी हो सकता है की इसकी खेती करने वालों की संख्या बहुत कम है जिसके कारण लेमनग्रास के तेल की मांग काफी ज्यादा है। ज्यादा मांग होने के कारण इसकी तेल की कीमत भी अच्छी मिलती है और अन्य फसलों के मुकाबले इसकी खेती मे खरपटवारों तथा कीटो का प्रकोप कम होता है एवं जंगली पशुओ से भी फसल को नुकसान नहीं होता है क्योंकि इसकी फसल को पशु नहीं खाती है। 


लेमनग्रास के उपयोग (Uses of LemonGrass in Hindi)

  1. लेमनग्रास की पत्तियों का उपयोग चाय बनाने मे किया जाता है लेमनग्रास चाय का सेवन करने से  सिरदर्द, माइग्रेन आदि के प्रॉब्लम वाले लोगों के लिए लेमनग्रास टी पीना काफी फायदेमंद माना जाता है।
  2. लेमनग्रास के तेल का उपयोग उच्च कोटि के इत्रो के उत्पादन मे किया जाता है।
  3. इसके तेल का उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों, सौंदर्य सामग्रियों एवं साबुन आदि के उत्पादन मे किया जाता है। 
  4. इसके औषधिए गुणों के चलते इसका उपयोग दवाई बनाने मे भी किया जाता है। 

लेमनग्रास के फायदे

लेमनग्रास एक ऐसा पौधा है जिसमे अनेकों औषधीय गुण पाए जाते है इसके औषधिए गुणों के चलते इसका उपयोग हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है ये साधारण सा दिखने वाला पौधा कई बीमारियों जैसे सिरदर्द, सर्दी, बुखार आदि से बचाने में मदद कर सकता हैं तथा इसके साथ ही इसमे विटामिन ए, जिंक, फोलिक एसिड, कॉपर, कैल्शि्यम, मैगनीज़, फास्फोररस, पोटैशियम और आयरन जैसे तत्व पाए जाते हैं. जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी माने जाते है।

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Frequently Asked Questions (FAQs)

Q. लेमनग्रास को कैसे लगाएं ?
लेमनग्रास के पौधों को लगाने के लिए 5 से 7 सेमी गहरे गड्ढे करके इसकी रोपाई करनी चाहिए। गड्ढे मे लेमनग्रास के स्लिप को इस तरह से लगाना चाहिए जिससे कि स्लिप गड्ढे मे खङी रहे तथा इसकी जङे मुडे न। लेमनग्रास के स्लिप की रोपाई के बाद स्लिप का निचला हिस्सा मिट्टी से अच्छी तरह से दबा देना चाहिए। लेमनग्रास के स्लिप की रोपाई के बाद सिचाई कर देनी चाहिए।

 

Q. लेमन ग्रास की खेती कब की जाती है ?
अगर किसानों के पास सिचाई की अच्छी व्यवस्था है तो लेमनग्रास की खेती पूरे साल किया जा सकता है लेकिन लेमनग्रास को प्रायः वर्षा ऋतु के प्रारंभ में लगाया जाता है जिससे की ज्यादा सिचाई की आवश्यकता नहीं होती है तथा इसकी रोपाई का कार्य फरवरी-मार्च तथा जुलाई-अगस्त मे भी काफी जगहों पर किया जाता है ऐसा देखा गया है कि अन्य महीनों के अपेक्षा फरवरी-मार्च मे लगाई गई फसल से अन्य महीने मे लगाई गई फसल की तुलना मे फरवरी-मार्च मे लगाई गई फसल से अच्छी पैदावार किसानों को मिलता है।

 

Q. लेमनग्रास को हिंदी में क्या कहते हैं ?
लेमनग्रास को हिन्दी मे नींबू घास के रूप मे भी जाना जाता है इसे हमारे देश मे कई नामों से जाना जाता है इसे नींबू घास, मालाबार घास एवं कोचीन घास आदि नामों से भी जाना जाता है।

 

Q. लेमन ग्रास गमले में कैसे उगाएं ?
लेमनग्रास को गमले मे आसानी से उगाया जा सकता है इसके लिए गमले की साइज़ थोङा बङा और गहरा होना चाहिए क्योंकि यह करीब 2 से 3 फिट तक बढ़ सकती है। लेमनग्रास के स्लिप को गमले मे कुछ इस तरह से लगाए कि स्लिप गमले मे खङी रहे तथा इसकी जङे मुडे नही। गमले मे लगाने के बाद इसकी जङो को मिट्टी से अच्छी तरह से दबा दे। लेमनग्रास के स्लिप को गमले मे रोपाई हो जाने के बाद गमले मे पानी का छीरकाव कर दे।

 

Q. लेमन ग्रास का तेल क्या रेट है ?
लेमनग्रास की तेल की कीमत मे गिरावट और उछाल आते रहता है इसकी कीमत 800 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम या इससे कभी-कभी अधिक भी होता है कभी-कभी तो ऐसा भी देखा गया है कि इसके भाव मे काफी उछाल आता है। इसकी कीमत पूरी तरह से बाजार भाव पर निर्भर करता है।

 

तो दोस्तों मुझे आशा है कि आपको लेमनग्रास से जुड़ी जानकारी पसंद आयी होगी इस पोस्ट मे लेमनग्रास से जुङी अनेक प्रकार की जानकारियाँ दी गई है। अगर आपको इस पोस्ट से संबंधित कोई भीं सवाल हो तो आप हमसे कमेंट सेक्शन में पूछ सकते है।

तो दोस्तों मुझे आशा है कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा, अगर आपको पसंद आया है तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे। और उन तक भी लेमनग्रास के बारे मे जानकारी पहुँचाए।

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